सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों के पक्षपात पर निचले पायदान वालों के लिए अधिकतम लाभ की बात कही

सुप्रीम कोर्ट ने लोन मामले में बैंकों की कड़ी आलोचना की है। अदालत का कहना है कि बैंक बड़ी संस्थाओं को भारी ऋण देने की में लापरवाही बरतते हैं, जबकि आम नागरिकों को छोटे व्यक्तिगत ऋण लेने के लिए कठोर शर्तों और जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।

न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की पीठ ने 19 मई को पारित एक आदेश में कहा कि इस तरह की प्रथाएं उत्पीड़न की सीमा तक पहुंचती हैं और वह आम उधारकर्ताओं के प्रति व्याप्त भेदभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ मेसर्स भास्कर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पीठ का कहना है कि वह प्रतिवादी संख्या 1-एसबीआई के आचरण को अनदेखा नहीं कर सकती।

पीठ ने यह भी कहा कि मामले में याचिकाकर्ता संख्या 1-कंपनी को 8,09,00,000 रुपये का भारी ऋण देने/मंजूर करने में एसबीआई और उसके अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती गई, क्योंकि याचिकाकर्ता ऋण चुकाना शुरू भी नहीं कर सके और पहली ही बार में चूक कर बैठे।

पीठ ने इस आधार पर एक स्पष्ट संकेत की बात कहते हुए कहा कि एसबीआई अधिकारियों ने लोन लेने वाले याचिकाकर्ताओं की लोन चुकाने की क्षमता का ठीक से जायज़ा नहीं लिया।

बेंच ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि एसबीआई सहित तमाम बैंक आम तौर पर बड़ी संस्थाओं को भारी ऋण देने में लापरवाही बरतते हैं, जबकि वहीं आम लोगों द्वारा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए लिए जाने वाले छोटे ऋणों के मामले में वे बहुत सख्त शर्तें लगाते हैं। इस बीच याचिकाकर्ता को एक जटिल प्रक्रिया में उलझा दिया जाता हैं। अदालत का कहना है कि यह प्रक्रिया कुछ मामलों में उत्पीड़न की सीमा तक पहुंच सकती है।

इस प्रकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए अदालत का कहना है, ‘गलतफहमी से बचने के लिए, यह स्पष्ट कर दिया जाए कि हम किसी भी तरह से ऋण सुविधाओं के लिए नियमों और आवश्यकताओं में ढील देने का सुझाव नहीं दे रहे हैं, जो कि भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित बैंकों पर छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन अपनाई गई प्रक्रिया को निश्चित रूप से ऋण चाहने वालों/आवेदकों के लिए और उसके बाद वसूली के चरण में भी आसान और निष्पक्ष बनाया जा सकता है।’

न्यायाधीश ने आगे यह भी कहा कि रियायतों/प्रोत्साहनों के संबंध में, नीति को इस प्रकार तैयार या वर्गीकृत किया जाना चाहिए जिससे सामाजिक/आर्थिक स्तर के सबसे निचले पायदान पर रहने वालों को अधिकतम लाभ मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *