सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी का रेगुलेशन सिस्टम न होने पर अफसोस जताया

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में बिटकॉइन ट्रेडिंग पर अफसोस जताते हुए कहा है कि केंद्र अभी तक क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बना पाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी का रेगुलेशन सिस्टम न होने पर अफसोस जताया

जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह तथा जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत दो साल पहले केंद्र से क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग पर पॉलिसी के बारे में कोर्ट को जानकारी देने के लिए कह चुकी है। पीठ का कहना है कि अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।

बताते चलें कि अवैध बिटकॉइन ट्रेडिंग मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। आरोपी पर बिटकॉइन ट्रेडिंग करने के अलावा हाई रिटर्न का भरोसा दिलाकर देश भर में इन्वेस्टर्स को ठगने का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक केस के दौरान कहा कि भारत में बिटकॉइन का व्यापार करना “हवाला कारोबार के परिष्कृत तरीके से निपटने” जैसा है। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि केंद्र अब तक आभासी मुद्रा को विनियमित करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं बना पाया है।

बीते वर्ष जनवरी में केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी में कहा गया था कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने और इससे जुड़े अपराधों की जांच करने के सिस्टम पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी का कहना था कि भारत में बिटकॉइन ट्रेडिंग अवैध नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भारतीय रिजर्व बैंक के एक सर्कुलर को रद्द कर चुका है।

अदालत से रोहतगी ने यह भी कहा कि बिटकॉइन की कीमत बहुत ज्यादा है। कोई भी व्यक्ति एक बिटकॉइन से विदेश में किसी शोरूम में जाकर कार खरीद सकता है। आगे उन्होंने बताया कि जब रविवार को उन्होंने चेक किया तो पाया कि एक बिटकॉइन की कीमत 82 लाख रुपए थी।

मामले पर अदालत ने राज्य और ईडी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दस दिन का समय दिया है। केस की अगली सुनवाई 19 मई को होनी है।

बताते चलें कि गुजरात सरकार और प्रवर्तन निदेशालय की पैरवी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वे विस्तृत जवाब दाखिल करना चाहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी, 2022 को केंद्र से पूछा था कि क्या क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग पर कोई कानून है या नहीं। दरअसल, कोर्ट एक व्यक्ति पर दर्ज कई FIR रद्द करने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।

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