पीटीआई की एक खबर के मुताबिक़, अनिल अंबानी पर 31,580 करोड़ का बैंक फ्राड का मामला है। इस संबंध में स्टेट बैंक की ओर से कहा गया है कि कई बैंकों से लोन लेकर उसका इस्तेमाल ग़लत कामों में किया। हालाँकि अनिल अंबानी के वकील इसे सही नहीं मानते हैं।

खबर में यह भी कहा गया गया है कि स्टेट बैंक आफ इंडिया अनिल अंबानी का नाम भारतीय रिज़र्व बैंक को रिपोर्ट करने जा रहा है। अनिल अंबानी की तरफ से बुधवार को किए गए दावे में कहा गया है कि भारतीय स्टेट बैंक ने दिवालिया हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के ऋण खाते पर ‘धोखाधड़ी’ का टैग लगा दिया है, जबकि उसने अपने निर्णय का कोई आधार नहीं बताया है और न ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनवाई का मौका दिया है।
अंबानी ने अपने कानूनी सलाहकार के माध्यम से एसबीआई को लिखे पत्र में कहा है कि बैंक का आदेश एकपक्षीय था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसलों के साथ-साथ आरबीआई के दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी की गई। पत्र में अंबानी को व्यक्तिगत सुनवाई से वंचित किए जाने के साथ यह भी आरोप लगाया गया कि एसबीआई ने अपने फैसले का आधार बताने के बार-बार किए गए अनुरोधों को नजरअंदाज किया है।
समाचार पत्र मिंट द्वारा पत्र की एक प्रति देखे जाने की बात कही गई है जिसमें संकटग्रस्त दूरसंचार ऑपरेटर द्वारा मंगलवार को एक्सचेंजों को सूचित किया कि एसबीआई ने कंपनी के ऋण खाते को “धोखाधड़ी” के रूप में वर्गीकृत करने और इसके पूर्व निदेशक-अनिल अंबानी का नाम भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को रिपोर्ट करने का फैसला किया है।
पत्र पीटीआई के हवाले से आगे लिखता है कि फाइलिंग के अनुसार, 23 जून को एसबीआई ने आरकॉम को कंपनी को अपने फैसले के बारे में सूचित करते हुए पत्र लिखा। फाइलिंग के अनुसार, आरकॉम और उसकी शाखाओं को विभिन्न बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये का ऋण मिला।
आगे पत्र में यह भी कहा गया है कि मंगलवार को आरकॉम की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, एसबीआई की धोखाधड़ी पहचान समिति ने ऋणों के उपयोग में विचलन के मामले पाए।
आगे एसबीके हवाले से कहा गया है- “हमने अपने कारण बताओ नोटिस के जवाबों का संज्ञान लिया है और उनकी उचित जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि प्रतिवादी ने ऋण दस्तावेजों की शर्तों और नियमों का पालन न करने या आरसीएल के खाते के संचालन में बैंक की संतुष्टि के अनुरूप अनियमितताओं को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताए हैं।”
इस बीच, अंबानी के वकील के पत्र में दावा किया गया कि एसबीआई ने आरकॉम के अन्य गैर-कार्यकारी और स्वतंत्र निदेशकों को जारी किए गए इसी प्रकार के नोटिस वापस ले लिए, जबकि अंबानी को – जो गैर-कार्यकारी भूमिका में थे – गलत तरीके से फर्म के परिचालन निर्णयों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
पत्र में कहा गया है कि चूंकि एसबीआई ने सभी प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं, इसलिए अंबानी के लिए कारण बताओ नोटिस में लगाए गए आरोपों पर विस्तृत जवाब देना लगभग असंभव हो गया है।
अंबानी के वकील ने लिखा, “बैंक हमारे मुवक्किल को इस मामले में व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने में भी विफल रहा है, ताकि समिति द्वारा कोई निर्णय लिए जाने से पहले वह बैंक की समिति के समक्ष अपनी बात रख सकें।”
इसके अलावा, पत्र में उचित प्रक्रिया में कई कथित खामियों का उल्लेख किया गया है, जिसमें एसबीआई द्वारा फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट (एफएआर), अनुलग्नकों और अन्य अंतर्निहित दस्तावेजों की पूर्ण प्रतियां उपलब्ध कराने में विफलता भी शामिल है, जो आरोपों का आधार बनते हैं।
पत्र में उद्धृत एक उदाहरण अधूरा अनुलग्नक 5-सी है, जिसे केवल एक्सेल शीट के प्लेसहोल्डर आइकन के रूप में साझा किया गया था – जिससे ग्राहक को प्रतिक्रिया देने का कोई भी सार्थक अवसर नहीं मिल पाया।
पत्र के मुताबिक़, एसबीआई से कानूनी नोटिस में कहा गया है कि वह 23 जून के अपने आदेश को तुरंत वापस ले और ग्राहक को दस्तावेजों का पूरा सेट और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान करे। इसमें पांच दिनों के भीतर लिखित पुष्टि भी मांगी गई है कि बैंक आरबीआई को किसी भी तरह की रिपोर्टिंग सहित वर्गीकरण पर कार्रवाई करने से परहेज करेगा।













