मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप की बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। बच्चों की मौत का संबंध इसी सिरप के इस्तेमाल से बताया जा रहा है।

कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तुरंत रोक का फैसला यूपी सहित मध्य प्रदेश, केरल और तमिलनाडु के बाद महाराष्ट्र पर भी लगा दिया गया है। महाराष्ट्र इस दवा को प्रतिबंधित करने वाला पांचवां राज्य है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल और तमिलनाडु के बाद महाराष्ट्र पांचवां राज्य है जिसने यह कार्रवाई की है। तेलंगाना ने भी जनता को कफ सिरप का उपयोग बंद करने के लिए अलर्ट जारी किया है। साथ ही सभी ड्रग्स इंस्पेक्टरों और सहायक आयुक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों को सतर्क करें ताकि यदि बाजार में उक्त उत्पाद बैच का कोई भी स्टॉक तुरंत फ्रीज की जा सके।
इस सिरप की शुरुआती जांच में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट की आशंका है जो एक जहरीला औद्योगिक रसायन है। इसे रसायन जो गंभीर विषाक्तता के लिए जाना जाता है। इस सिरप का निर्माण तमिलनाडु के श्रीसन फार्मा द्वारा लिया गया है। सिरप का उत्पादन मई 2025 में किया गया था और इसकी एक्सपायरी तिथि अप्रैल 2027 है।
अपने अलर्ट में एफडीए ने सभी लाइसेंसधारियों और आम जनता को कोल्ड्रिफ सिरप बैच नंबर SR-13 की बिक्री, वितरण और उपयोग को तुरंत रोकने का निर्देश दिया है। साथ ही स्थानीय औषधि नियंत्रण अधिकारियों को भी बिना किसी देरी के किसी भी स्टॉक की रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा विभाग ने इस बैच के सिरप के कब्जे संबंधी जानकारी देने का जनता से आग्रह किया है। लोग संबंधित जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-222-365 पर सूचित कर सकते हैं अथवा 9892832289 नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है। साथ ही इस विषय में jchq.fda-mah@nic.in पर ईमेल भी भेज सकते हैं।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप पीने से बीमार हो गए थे। इन बच्चों में से 9 की बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई और यह कहा गया कि बच्चों की मौत की बड़ी वजह कफ सिरप है।
एहतियात के तौर पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में कथित रूप से संदूषित कफ सिरप के मद्देनजर छह राज्यों में खांसी की दवा, ‘एंटीपाइरेटिक्स’ और एंटीबायोटिक समेत 19 दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू किया है।







