सूबे की राजधानी लखनऊ में प्रवेश के स्थान पर सात प्रमुख मार्गों पर प्रवेश द्वार बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि राजधानी लखनऊ में प्रवेश करते ही यूपी की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि लखनऊ से प्रयागराज सहित वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, हस्तिनापुर, मथुरा और झांसी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर प्रवेश द्वार बनाए जाएं। उन्होंने आदेश में कहा कि इन परसंबंधित सांस्कृतिक और धार्मिक गंतव्यों की पहचान को दर्शाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी प्रवेश द्वारों पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह जरूर दर्शाया जाए।
जधानी लखनऊ में प्रवेश करते समय जल्द भव्य द्वार स्वागत करेंगे। प्रदेश सरकार ने लखनऊ में सात प्रवेश द्वार के निर्माण पर मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रवेश द्वार पर यूपी की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।
शासकीय भवनों के मेंटेनेंस व्यवस्था के अनुबंधों में एकरूपता के अभाव की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण की तर्ज पर सभी नए भवनों में 5 वर्ष का भुगतान आधारित मेनटनेंस अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। पुराने भवनों के मेनटेनेंस के लिए कॉर्पस फंड भी बनाया जाए।
प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड) पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ परंपरा को दर्शाने वाला ‘संगम द्वार’,
वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड) पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को दर्शाने वाला ‘नंदी द्वार’
अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड) पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा पर आधारित ‘सूर्य द्वार’
नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड) पर ‘व्यास द्वार’,
हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड) पर ‘धर्म द्वार’,
मथुरा मार्ग (आगरा रोड) पर ‘कृष्ण द्वार’
झांसी मार्ग (उन्नाव रोड) पर वीरता और शौर्य का प्रतीक ‘शौर्य द्वार’
की स्थापना की बात मुख्यमंत्री ने कही है।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक मार्ग पर विकसित किया जाने वाला प्रवेश द्वार उस गंतव्य की पौराणिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रतिबिंबित करने वाला होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रवेश द्वारों के निर्माण के लिए कारपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी के फंड को उपयोग की बात कही। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भवन, सड़क, ब्रिज, सीवर लाइन और जलापूर्ति पाइपलाइन जैसी परियोजनाओं का थर्ड पार्टी क्वॉलिटी ऑडिट आईआईटी, एनआईटी और राज्य/सरकारी तकनीकी संस्थानों से करवाए जाने की बात कही।















