डॉक्टर क्लाइव बॉडी के अनुसार, जो तरीका हम आज के टॉक्सिक ऑफिस के माहौल में देखते हैं, वह 1629 की इस घटना में भी दिखता है। उन्होंने विरोधियों को हटाया, वफ़ादारों को इनाम दिया, डर का माहौल बनाया, अपने फॉलोअर्स का इस्तेमाल अपने मकसद के लिए किया और हर कीमत पर पावर हासिल करने की कोशिश की।
एक अध्ययन बताता है कि आज के बिज़नेस में सत्तावादी नेतृत्व (Authoritarian Leadership) से जुड़े व्यक्तिगत खासियतें(personality traits) लगभग 400 साल पहले ग्लोबल कैपिटलिज़्म के शुरुआती दिनों में भी मौजूद थे।
रिसर्च में यह भी कहा गया है कि कॉर्पोरेट साइकोपैथ आज भी मॉडर्न ऑर्गनाइज़ेशन के लिए एक बड़ी चुनौती हैं, ऐसे लोगों की लीडरशिप ऑफिस में हैरेसमेंट, बुलीइंग, एम्प्लॉई की भलाई में कमी, स्टाफ का ज़्यादा टर्नओवर और आखिर में ऑर्गनाइज़ेशनल फेलियर जैसी समस्याओं से जुड़ी है।
यूरेकअलर्ट (EurekAlert) के अनुसार, एशियन जर्नल ऑफ़ बिज़नेस एथिक्स में छपी एक स्टडी ने ऑफिशियली डच ईस्ट इंडिया कंपनी के ट्रेडिंग मैनेजर जेरोनिमस कॉर्नेलिज़ को दुनिया का सबसे पुराना कॉर्पोरेट साइकोपैथ बताया है।
एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी (ARU) के डॉक्टर क्लाइव बॉडी की इस स्टडी को पहली स्टडी माना जाता है क्योंकि इसमें जेरोनिमस कॉर्नेलिज़ के व्यवहार की कॉर्पोरेट साइकोपैथी के लिए एक जाने-माने एनालिटिकल क्राइटेरिया के तहत सुनियोजित तरीके से जांच की गई जो सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं के मतलब पर निर्भर रहने से जुड़ी नहीं थीं।
स्टडी के अनुसार, कॉर्पोरेट साइकोपैथ से जुड़े सभी 10 मुख्य ट्रेट्स जेरोनिमस कॉर्नेलिज़ (Jeronimus Cornelisz) में पाए गए। इन खासियतों में लोगों का भरोसा जीतने के लिए चापलूसी और मनाने का इस्तेमाल करना, वफ़ादार सपोर्टर्स का ग्रुप बनाना, संभावित दुश्मनों को खत्म करना, विरोधियों के बीच फूट डालना, डर का माहौल बनाना, चीज़ें गलत होने पर ज़िम्मेदारी लेने से बचना, और बाकी सब चीज़ों से ज़्यादा पावर, पैसा और अधिकार को प्राथमिकता देना शामिल है।
डच ईस्ट इंडिया कंपनी दुनिया की पहली मल्टीनेशनल कंपनी थी जिसके मालिक शेयरहोल्डर्स थे। यह वही कंपनी थी जिसने 1602 में एम्स्टर्डम में दुनिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज में से एक की स्थापना की थी।
रिसर्च के अनुसार, गेरोनिमो कॉर्नेलिज़ का मामला दिखाता है कि पावर, पैसा और पर्सनल तरक्की चाहने वाले लोग कैपिटलिस्ट बिज़नेस के शुरुआती दिनों से ही कमर्शियल कंपनियों की ओर आकर्षित होते रहे हैं।
जहाज़ का टूटना और नरसंहार
रिसर्च का फोकस बदनाम जहाज़ ‘बटाविया’ है, जो 1629 में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के तट पर चट्टानों से टकरा गया था, जिससे लगभग 200 लोग अलग-अलग दूर के द्वीपों पर फँस गए थे।
जहाज़ के सीनियर अधिकारी मदद लेने के लिए जकार्ता (इंडोनेशिया) गए और कंपनी के व्यापारी हिरोनिमस कॉर्नेलियस को बचे हुए लोगों में सबसे सीनियर कॉर्पोरेट अधिकारी के तौर पर छोड़ दिया।
डॉक्टर क्लाइव बॉडी ने रिसर्च में बताया है कि हिरोनिमस कॉर्नेलियस ने तेज़ी से पावर मज़बूत की, काउंसिल मेंबर्स की जगह अपने वफ़ादार सपोर्टर्स को रखा, लोगों से वफ़ादारी की पर्सनल कसमें लीं और संभावित विरोधियों को अलग-थलग कर दिया। उसके नेतृत्व में लगभग 100 पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए, जबकि कुछ महिलाओं के साथ यौन हिंसा भी हुई।
गेरोनिमो कॉर्नेलियस ने यह दावा करके हत्याओं को सही ठहराने की कोशिश की कि वे खाने और पानी की सप्लाई को बचाने का एक तरीका थे, लेकिन इस हत्याकांड का नतीजा उन लोगों का भी खत्म होना था जिन्हें वह संभावित दुश्मन मानता था।
दूसरे द्वीप पर बचे लोगों की रणनीति
दूसरी ओर, गेरोनिमो कॉर्नेलियस द्वारा एक अलग द्वीप पर छोड़े गए लोगों को वीबे हेस नाम के एक आदमी ने लीड किया। वीबे हेस ने ताज़ा पानी और खाना खोजने के लिए अभियान चलाए।
इन कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि दो मीठे पानी के कुएं मिले, जबकि खाने के लिए समुद्री पक्षियों के अंडे भी मिले, इसके अलावा मछलियां, वॉलाबी और सील भी बहुत ज़्यादा मात्रा में मिलीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीबे हेस के एक फॉलोअर ने अंदाज़ा लगाया कि जो खाना मौजूद था, वह सभी बचे हुए लोगों को 1,000 साल तक ज़िंदा रखने के लिए काफी रहा होगा।
अथॉरिटेरियन लीडरशिप का तरीका आज भी मौजूद है
एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर और कॉर्पोरेट साइकोपैथी के फील्ड में एक जाने-माने रिसर्चर, डॉक्टर क्लाइव बॉडी ने हिरोनिमस कॉर्नेलियस को पहला कॉर्पोरेट साइकोपैथ कहा है। उन्होंने कहा है कि जो बात इस मामले को खास बनाती है, वह यह है कि जब हम मॉडर्न मैनेजेरियल साइकोपैथी के विश्लेषणात्मक मापदंड (Analytical Criteria) के तहत हिरोनिमस कॉर्नेलियस की जांच करते हैं तो पाते हैं कि उनमें कॉर्पोरेट साइकोपैथ से जुड़ी हर बड़ी खासियत थी।