सहारा रेगिस्तान में मिले प्राचीन व्हेल अवशेषों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि हज़ारों साल पहले व्हेल के हाथ और पैर हुआ करते थे।

लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र में ‘व्हेल वैली’ (Whale Valley) या ‘वादी अल-हैतन’ (Wadi Al-Hitan) नामक एक रेगिस्तानी इलाक़े में 400 से ज़्यादा प्राचीन व्हेल अवशेष मौजूद हैं, जो व्हेल के ज़मीन से समुद्र तक के उल्लेखनीय विकासवादी सफ़र को दर्शाते हैं। यूनेस्को के अनुसार, वादी अल-हैतन का इतिहास इओसीन युग से है, जो 5.58 करोड़ से 3.39 करोड़ साल पहले का है, जब यह क्षेत्र टेथिस सागर में डूबा हुआ था।
यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि इस घाटी में मिले व्हेल अवशेष इसके विकास की कहानी बताते हैं और उन पर किए गए शोध से पता चला है कि व्हेल प्राचीन काल में ज़मीन पर रहने वाले जानवरों में से एक थीं। वादी अल-हैतन में पहली बड़ी खोज 1902 में हुई थी, जब जीवविज्ञानियों ने व्हेल की एक पहले से अज्ञात प्रजाति, बासुलोसॉरस आइसिस की खोज की थी।
मिस्र की व्हेल घाटी, जिसे अरबी में “वादी अल-हितान” कहा जाता है, में 400 से अधिक प्राचीन व्हेल कंकाल मौजूद हैं, जो इन प्राणियों के स्थलीय से लेकर समुद्री जीवों तक के विकास की झलक पेश करते हैं।
बाद में 1989 में मिशिगन विश्वविद्यालय और मिस्र के भूवैज्ञानिक संग्रहालय की एक टीम ने बेसुलोसॉरस आइसिस के अवशेषों की खोज की, जिसमें व्हेल के पैर, पंजे और उंगलियाँ संरक्षित थीं। इस दुर्लभ खोज ने इस बात की पुष्टि की कि अतीत में व्हेल के पैर हुआ करते थे।
2023 में हवाई विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि हालाँकि अब व्हेल के पैर नहीं हैं, फिर भी उनके कूल्हे की हड्डियाँ मौजूद हैं, जो इस बात का संकेत है कि व्हेल अतीत में ज़मीन पर रहती थी।
बेसुलोसॉरस आइसिस के अवशेषों की खोज के कारण यूनेस्को ने 2005 में वादी अल-हैतन को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, क्योंकि इस दुर्लभ खोज के कारण शोधकर्ताओं को कई अन्य प्राचीन जलीय जीवों के अवशेष खोजने में मदद मिली। वादी अल-हैतन यहाँ चल रहे वैज्ञानिक अनुसंधान और कड़ी सुरक्षा की वजह से एक ओपन एयर म्यूज़ियम की हैसियत रखता है।














