रेलवे के पास धन की किल्लत नहीं थी उसके बावजूद योजनाओं को लागू करने में गंभीर खामियां पाई गईं। पांच वर्षों में करीब 5956 करोड़ रुपये की राशि उपयोग नहीं की गई है।
रेलवे बोर्ड देश के सभी स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाने के निर्देश करीब आठ वर्ष पहले दिए गए थे। इस संबंध में सीएजी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा स्टेशनों का ऑडिट किया गया। ऑडिट रिपोर्ट के नतीजे डरावने पाए गए हैं। अफ़सोस की बात यह है कि अप्रैल 2018 में दिए गए आदेशों के बावजूद परिस्थितियां शर्मनाक बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सीएजी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने देशभर के 16 रेलवे ज़ोनों के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया है। जांच में पाया गया कि इनमें से 458 स्टेशन यानी करीब 89 प्रतिशत से अधिक स्टेशन एक या उससे अधिक न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं (एमईए) में कमी वाले निकले।
यह रिपोर्ट cag.gov.in पर सार्वजानिक है। रिपोर्ट से यह भी पता चला कि केवल 54 स्टेशन ही ऐसे थे जहां इन सुविधाओं में कोई कमी नहीं पाई गई। गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश दिया था कि सभी स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि देश की राजधानी दिल्ली साहिर हावड़ा, मुंबई सेंट्रल, सीएसएमटी, अहमदाबाद, चेन्नई सेंट्रल और सिकंदराबाद जैसे देश के प्रमुख रेलवे स्टेशन भी ज़रूरी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं।
जांच से यह भी सामने आया कि कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी के नल कम हैं। यहाँ साफ़-सफ़ाई से जुड़ी अनिवार्य सुविधाएं जैसे मूत्रालय और शौचालय की भी कमी है। इन स्टेशनों पर पंखे और कूलर भी पर्याप्त नहीं हैं साथ कई स्थानों पर साइन बोर्डों की कमी भी देखने को मिली।
गौरतलब है कि जिन स्टेशनों से रोज़ाना लाखों यात्री गुज़रते हैं और जिनकी बदौलत रेलवे करोड़ों रुपये की कमाई करता है, ऐसे ही शीर्ष दस स्टेशनों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी दर्ज की गई।
इस ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक़, कई जगहों पर यात्रियों को पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध नहीं है, जबकि रेलवे ने पहले दावा किया था कि सभी स्टेशनों पर पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है। रिपोर्ट बताती है कि 512 स्टेशनों में से 138 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी मिली। वहीँ 111 स्टेशनों पर मूत्रालय और 59 स्टेशनों पर शौचालय निर्धारित मानकों से कम पाए गए। प्रतीक्षालय की बात करें तो 21 स्टेशनों पर यह नहीं था।
पानी की गुणवत्ता के बारे में रिपोर्ट बताती है कि कई स्टेशनों पर पानी की नियमित जांच नहीं हुई। जिसके स्थिति को गंभीर चिंताजनक कहा जा सकता है। इस संबंध में सीएजी ने कहा है कि यात्रियों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने के लिए रेलवे को अपनी व्यवस्था और मज़बूत करनी होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक़, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से लेकर दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पूर्व रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। इस बैक्टीरिया को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा 2017 में ‘सुपरबग’ की श्रेणी में रखा गया था।
सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि, 247 स्टेशनों पर फुट ओवर ब्रिज़ और प्लेटफॉर्म शेल्टर के बीच ढका हुआ रास्ता नहीं होने से यात्रियों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। इनमें
65 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म शेल्टर निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं पाए गए। देश के 379 स्टेशनों पर जहां जनरल डिब्बे रुकते हैं वहां यात्रियों को धूप और बारिश से संरक्षण देने के लिए पर्याप्त शेड नहीं पाए गए।
सेहत से जुड़े मामले की दशा सबसे गंभीर मिली। जांच से पता चला है कि 512 में से 441 स्टेशनों पर न ही इमरजेंसी मेडिकल रूम मिला और न ही एम्स की सिफारिशों के अनुरूप मेडिकल बॉक्स उपलब्ध थे।
कैग रिपोर्ट में 395 यात्री सुविधा परियोजनाओं की समीक्षा से पता चलता है कि 59 प्रतिशत काम तय समय से देरी से पूरे हुए जबकि कुछ परियोजनाएं तीन से चार साल तक लटकी रहीं।
रिपोर्ट में आवारा कुत्तों की मौजूदगी भी 301 स्टेशनों पर दर्ज की गई। पान और गुटखे के निशान भी 243 स्टेशनों पर मिले जबकि 21 स्टेशनों पर खुले में शौच जैसी समस्याएं भी सामने आईं।
रिपोर्ट से यह तथ्य भी सामने आया कि रेलवे के पास धन की किल्लत नहीं थी उसके बावजूद योजनाओं को लागू करने में गंभीर खामियां पाई गईं। पांच वर्षों में करीब 5956 करोड़ रुपये की राशि उपयोग नहीं की गई है। यानी वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित बजट का 36 से 44 फ़ीसदी तक हिस्सा खर्च ही नहीं किया जा सका।