स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के नाम अपने संबोधन में सभी को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि हम सबके लिए यह गर्व की बात हैं कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस सभी भारतीय उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। ये दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण कराते हैं।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया। जिससे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली। हमारे लिए हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है।
भारत-भूमि को विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती बताते हुए उन्होंने इसे लोकतंत्र की जननी बताया। आगे उन्हों कहा कि हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि हैं।
देश की आजादी का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विदेशी हुकूमत की लंबी अवधि के बाद स्वाधीनता के समय भारत घोर गरीबी से जूझ रहा था। लेकिन तब से अब तक के 78 वर्षों में हमने सभी क्षेत्रों में अशाधारण प्रगति की है। भारत ने आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के मार्ग पर काफी दूरी तय कर ली है और प्रबल आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आर्थिक क्षेत्र में की गई उपलब्धियों का भी ज़िक्र किया।
राष्ट्रपति ने भारत की विश्व में बढ़ती छवि के हवाले से कहा कि पिछले वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी की सकल-घरेलू उत्पाद वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। वैश्विक अर्थव्यसव्था में व्याप्त समस्याओं के बावजूद घरेलू मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के साथ बढे निर्यात की भी बात कही।
देशवासियों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा, ‘हमारे संविधान में ऐसे चार मूल्यों का उल्लेख है, जो हमारे लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाए रखने वाले चार स्तंभ हैं। ये मूल्य हैं- न्याय, स्वतंत्रतता,समता और बंधुत्व। ये हमारी सभ्यता के ऐसे सिद्धांत हैं, जिन्हें हमने स्वाधीनता संग्राम के दौरान पुन: जीवंत बनाया। मेरा मानना है कि इन सभी मूल्यों के मूल में व्यक्ति की गरिमा की अवधारणा विद्यमान है।’
राष्ट्रपति ने बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की बात कही। साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा गरीबों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाए जाने का भी ज़िक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग गरीबी रेखा से ऊपर तो आ गए हैं, लेकिन मजबूत स्थिति नहीं हैं, उनको भी ऐसी योजनाओं की सुरक्षा उपलब्ध है, ताकि वे फिर से गरीबी रेखा से नीचे न चले जाएं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि भारत में सबसे अधिक प्रगति, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुई है। लगभग सभी गांवों में 4G मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है और इससे डिजिटल भुगतान तकनीकी को बड़े पैमाने पर अपनाना संभव हो पाया है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत, कम समय में ही, विश्व का अग्रणी देश बन गया है। इससे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिला है। दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन में से, आधे से अधिक लेनदेन भारत में होते हैं।















