राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ओडिशा सरकार द्वारा आयोजित ब्लैक स्वान समिट, इंडिया में बीते दिन शामिल हुईं। यह आयोजन ओडिशा के भुवनेश्वर में ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के सहयोग से किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने तेजी से बदलती तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों और डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता पर बात की।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीकी प्रगति जहां नवाचार और विकास के नए अवसर पैदा कर रही है, वहीं साइबर सुरक्षा जोखिम, डीपफेक, भ्रामक सूचना और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
राष्ट्रपति ने तकनीक के दुरुपयोग से वित्तीय धोखाधड़ी और ठगी को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता और सतर्कता को बेहद आवश्यक बताया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र जैसे कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने ब्लैक स्वान समिट जैसे आयोजनों के माध्यम से कौशल विकास को प्रोत्साहित किए जाने की बात कही। इससे क्षमताओं को मजबूत करने, रोजगार सृजन और डिजिटल एवं वित्तीय परिवर्तन को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग के नए रास्ते सामने आते हैं।
राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को केवल अंतिम उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि पेशेवर, उद्यमी और नीति निर्धारण में सहभागी के रूप में शामिल करना आवश्यक है। हर नई नीति और प्लेटफॉर्म का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय इको-सिस्टम में कितना सशक्त बनाता है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की वित्तीय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिले हैं। किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं के बीच बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान अब आम हो चुके हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि इन वर्गों के लिए फिनटेक केवल एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि जीवनरेखा बन चुका है।















