बजट में भेदभाव पर विपक्षी दलों में नाराज़गी और संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन

केंद्रीय बजट 2024 से नाखुश विपक्ष ने इसकी कड़ी आलोचना की है। इस बजट में गैर-एनडीए दलों को ‘वंचित’ करने का आरोप लगाया गया है। प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय बजट के खिलाफ नारेबाजी भी की।

बजट में भेदभाव पर विपक्षी दलों में नाराज़गी और संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन

केंद्रीय बजट 2024 से नाराज विपक्षी दलों ने आज सुबह संसद तक विरोध मार्च निकाला और सदन के अंदर प्रदर्शन करने का फैसला लिया। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद में ‘भेदभावपूर्ण’ केंद्रीय बजट 2024 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे अन्याय बताते हुए विरोध करने की बात कही।

विपक्षी नेताओं को शिकायत है कि इस बजट में संसाधनों का अनुचित आवंटन किया गया है। उनके मुताबिक़, यह बजट एनडीए शासित राज्यों के पक्ष में है जबकि गैर-एनडीए शासन वाले राज्यों की इस बजट में अनदेखी की गई है।

इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर इण्डिया गठबंधन के दलों की बैठक में यह फैसला लिया गया। विभिन्न विपक्षी दलों के नेता अपनी शिकायतों पर चर्चा करने के साथ अपनी कार्यनीति बनाने के लिए बैठक में जमा हुए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का कहना है कि उनके आकलन के मुताबिक़ कानूनी गारंटी के साथ एमएसपी को लागू किया जा सकता है, जिसका ज़िक्र उनके घोषणापत्र में भी किया गया है।

इस मुद्दे पर राहुल गाँधी का कहना है कि उन्होंने एक बैठक में तय किया गया कि इण्डिया गठबंधन के दूसरे नेताओं से बात करके सरकार पर दबाव डालेंगे कि देश के किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।

इससे पहले प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया कि संसद में मिलने के लिए उनकी ओर से आमंत्रित किसान नेताओं को अंदर नहीं आने दिया गया। राहुल का कहना है की किसान नेताओं को यहां मिलने के लिए बुलाया था लेकिन उन्हें संसद में नहीं आने नहीं दिया गया।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें आशा थी कि वित्त मंत्री उन लोगों को राहत देंगी जिन्होंने छात्र ऋण लिया है। आगे उन्होंने कहा है कि वे नए छात्र ऋण देने जा रही हैं, लेकिन उन लोगों का क्या होगा जिन्होंने पहले से ही ऋण लिया है और उसे चुकाने में असमर्थ हैं?

आगे उन्होंने बताया कि मनरेगा फंड का आवंटन कम हो गया है। इंडेक्सेशन हटाने से उन लोगों को बहुत निराशा होगी जो संपत्ति रखते हैं, खासकर ऐसे लोग जिन्हें अपनी पिछली पीढ़ी से संपत्ति विरासत में मिली है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि केरल से कुछ उम्मीदें थीं, खासकर स्वास्थ्य क्षेत्र में, लेकिन वे सभी पूरी नहीं हुईं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश राज्यों के लिए इसमें बहुत कम है।

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