किन्हीं भी हालात में ‘परमाणु परीक्षणों की अनुमति कभी भी नहीं दी जा सकती- संयुक्त राष्ट्र

अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प परमाणु परीक्षण फिर से शुरू किए जाने सम्बन्धी बयान दे रहे हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिक्रिया में परमाणु प्रसार के विरुद्ध आगाह करते हुए परमाणु परीक्षणों पर रोक को क़ायम रखने का आहवान किया है।

किन्हीं भी हालात में 'परमाणु परीक्षणों की अनुमति कभी भी नहीं दी जा सकती- संयुक्त राष्ट्र

याद दिला दें कि अमरीकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि उनकी सरकार को परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करना चाहिए। गुरूवार को नियमित प्रैस वार्ता में संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने अमरीकी परमाणु हथियार परीक्षण की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर कहा, “महासचिव ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि वर्तमान परमाणु जोखिम पहले से ही चिन्ताजनक रूप से बढ़ रहे हैं, और ऐसे सभी कार्यों से बचना होगा जिनसे ग़लत या भ्रामक अनुमान लगाए जा सकें या विनाशकारी परिणामों वाले उकसाव को बढ़ावा मिले।”

पत्रकारों से बातचीत में उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने दुनिया को याद दिलाया कि “हमें पिछले 80 वर्षों में किए गए 2,000 से ज़्यादा परमाणु हथियारों के परीक्षणों की विनाशकारी विरासत को कभी नहीं भूलना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में परमाणु परीक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

बताते चलें कि 1945 से दुनिया भर में 2,000 से ज़्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं। जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी में 1945 में हुए परमाणु बमों के प्रयोग के भयावह प्रभाव अभी तक देखने को मिल रहे हैं।

फ़रहान हक़ ने आगे कहा कि युद्ध का ख़तरा पहले से ही चिन्ताजनक रूप से बहुत ज़्यादा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने पेंटागन को “हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करने” का निर्देश दिया है, जो रूस द्वारा नई परमाणु वितरण प्रणालियों के परीक्षण और चीन द्वारा नए बैलिस्टिक मिसाइल साइलो की तैनाती के जवाब में है।

याद दिला दें कि चीन ने कथित तौर पर 1996 के बाद से कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। वहीँ रूस में अन्तिम बार परमाणु परीक्षण 1990 में हुआ था, जिसकी पुष्टि की जा सकी थी। ग़ौरतलब है कि संयुक्त राज्य अमरीका ने 1996 में व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि (CTBT) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसने इस सन्धि की पुष्टि नहीं की है।

व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि संगठन (CTBTO) के कार्यकारी सचिव रॉबर्ट फ़्लायड ने कहा है कि यह सन्धि सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबन्ध लगाती है, जबकि उनकी एजेंसी “पृथ्वी पर कहीं भी किसी भी परमाणु हथियार परीक्षण विस्फोट का पता लगा सकती है, और लगाएगी।” आगे उन्होंने कहा कि यह एजेंसी, इस सदी में किए गए सभी छह घोषित परमाणु परीक्षणों का सफलतापूर्वक पता लगा चुकी है।

रॉबर्ट फ़्लायड ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण क्षण में “विश्व नेताओं के लिए आगे आने और सीटीबीटी का समर्थन करने तथा परमाणु हथियार परीक्षण से मुक्त विश्व के साझा लक्ष्य की दिशा में, समान आधार पर मिलकर काम करने का अवसर निहित है। “

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