देश में मातृत्व स्वास्थ्य और लैंगिक समानता पर यूएन की नई मुहिम

यूएन एजेंसी UNFPA ने भारत में मातृत्व स्वास्थ्य और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के इरादे से फ़ैशन डिज़ाइनर मसाबा गुप्ता और क्रिकेटर संजू सैमसन को अपने अभियानों से जोड़ा है।


यूएन रिपोर्ट्स के अनुसार, मसाबा गुप्ता को अगले एक वर्ष के लिए मातृत्व स्वास्थ्य से जुड़े विषयों के लिए पैरोकार नियुक्त किया गया है। मसाबा गर्भावस्था, प्रसव, प्रसव के बाद देखभाल और शुरुआती मातृत्व से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता का प्रसार करेंगी। मसाबा गुप्ता अब राष्ट्रीय लैंगिक समानता दूत कृति सैनन और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य व अधिकारों की पैरोकार सोहा अली ख़ान के साथ UNFPA इंडिया से जुड़ी प्रमुख हस्तियों में शामिल हो गई हैं।

वहीं, क्रिकेटर संजू सैमसन ने UNFPA इंडिया के लैंगिक समानता अभियान के तहत जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा, ‘हर किसी को बड़े सपने देखने और सम्मान के साथ जीने का समान अवसर मिलना चाहिए, चाहे वह कक्षा हो, कार्यस्थल या क्रिकेट का मैदान।’

संजू ने लैंगिक समानता को एक ऐसा मुद्दा बताया जिससे समझौता नहीं किया जा सकता है, और उम्मीद जताई कि उनकी आवाज़, परिवारों को इस विषय पर नए नज़रिए से सोचने के लिए प्रेरित करेगी।

वहीँ यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए मसाबा गुप्ता की भूमिका, इसी प्रगति को आगे बढ़ाना और मातृत्व के दौरान महिलाओं की शारीरिक व मानसिक ज़रूरतों को सार्वजनिक चर्चा के दायरे में लाने पर केन्द्रित होगी। उन्होंने कहा, ‘कोई आपको नहीं बताता कि मातृत्व, एक महिला से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से कितनी बड़ी क़ीमत माँगता है।’

भारत ने मातृत्व स्वास्थ्य में उल्लेखनीय प्रगति की है। साल 2022-2024 में मातृ मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 पर पहुँच गया, जो कि अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। अगला लक्ष्य, संयुक्त राष्ट्र के 2030 टिकाऊ विकास एजेंडा के तहत इस आँकड़े को घटाकर 70 पर लाना है। वर्ष 2000 से 2023 के दौरान इस आँकड़े में 73 प्रतिशत की कमी आ चुकी है।

भारत में UNFPA की प्रतिनिधि ऐंड्रिया वोज़नार ने कहा कि मातृत्व मौतों की रोकथाम सम्भव है, मगर उन पर विराम लगाने के लिए प्रसव से पहले, उसके दौरान और बाद में गुणवत्तापूर्ण देखभाल व सहायता सुनिश्चित करना ज़रूरी है।

UNFPA प्रतिनिधि ऐंड्रिया वोज़नार के अनुसार, ‘हर किसी को समान अवसर मिलना चाहिए।’ ऐसे में संजू के लैंगिक समानता के क्षेत्र से जुड़ने को भी बड़ी उम्मीदों से जोड़ा जा रहा है। UNFPA ने कहा है कि उनका समर्थन यह भी दिखाता है कि लड़के और पुरुष लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने में अहम साझीदार हो सकते हैं।

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