अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए व्यापारिक टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की है। ट्रंप द्वारा 14 देशों पर लगाए गए ये टैरिफ पहली अगस्त से प्रभावी होंगे।

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस कदम का मक़सद अमरीका के व्यापार घाटे को कम करना और उन नीतियों को दुरुस्त करना बताया जिनके कारण अमरीका को नुकसान हुआ है। नए टैरिफ के तहत, म्यांमार और लाओस पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक पर सबसे अधिक 40 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने इसे “टैरिफ लेटर्स की एक नई लहर” बताया। जिनके कारण उनका मानना है कि अमरीकी नुकसान की भरपाई को मुमकिन किया जा सकेगा।
नए टैरिफ को उन्होंने उन सालों पुरानी गलत नीतियों को सुधारने के लिए आवश्यक बताया है, जिनमें अमरीका पर भारी व्यापार घाटा थोप दिया गया था। उन्होंने आगे कहा- “अमरीका पर पड़ा यह व्यापार घाटा हमारी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।”
नए टैरिफ के तहत, जापान, दक्षिण कोरिया, कजाखस्तान और मलेशिया पर 25 प्रतिशत का सबसे कम टैरिफ लगाया गया है। जबकि सबसे अधिक टैरिफ म्यांमार और लाओस पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक पर है जो 40 प्रतिशत है। इसके बाद थाईलैंड और कंबोडिया पर 36 प्रतिशत, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 32 प्रतिशत और बोस्निया और हर्जेगोविना व दक्षिण अफ्रीका पर 30 प्रतिशत का शुल्क लगेगा।
बदले में शुल्क वृद्धि करने वाले देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा- “अगर आपने किसी भी कारण से अपने टैरिफ बढ़ाए तो आपने जितना प्रतिशत बढ़ाया होगा, हम उस पर उतना ही अतिरिक्त टैक्स और जोड़ देंगे।”
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रभावित देश अमरीका के इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। ऐसी में जानकारों का मानना है कि इस घोषणा से वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। इन टैरिफ के आर्थिक प्रभावों पर सभी की निगाह है।
इस संबंध में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जापान और दक्षिण कोरिया को सबसे पहले इसलिए चुना गया क्यूंकि यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है। लेविट के मुताबिक़ उन्होंने वही देश चुने जिन्हें वह उचित समझते हैं।
