दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की नई सूची जारी

संयुक्त राष्ट्र ने ‘इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस’ पर दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की लिस्ट जारी कर दी है। इस वर्ष की लिस्ट में 147 देशों को शामिल किया गया है, जिसमें कई युद्धग्रस्त देश भी शामिल हैं। 

दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की नई सूची जारी

संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से जारी वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 में फिनलैंड को लगातार आठवीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बताया गया है।

यह रिपोर्ट उस देश में रहने वाले लोगों के स्टेटस पर आधारित है। जिसमे रिपोर्ट तैयार करते समय वहां के नागरिकों से सवाल किया गया कि वह अपने जीवन से कितने खुश हैं, उनके पास कितना पैसा है, उनकी सेहत कैसी है और वह कितनी आज़ादी महसूस करते हैं।

विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2025 में भारतीय नागरिक पाकिस्तान, ईरान और यूक्रेन से भी ज़्यादा दुखी पाए गए हैं। फ़िनलैंड को एक बार फिर दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि लगातार आठ साल से यह देश अपना पहला स्थान बनाए रखने में कामयाब रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस सूची में 8 स्थानों का सुधार किया है और वह 126वें स्थान से 118वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर दुनिया के खुशहाल देशों की लिस्ट में पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से अच्छी है। पाकिस्तान इस लिस्ट में भारत से 9 पायदान ऊपर है यानी 109वें स्थान पर है। पिछले वर्ष पाकिस्तान 108वें स्थान पर था, लेकिन इस वर्ष वह एक स्थान गिरकर 109वें स्थान पर आ गया।

रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान को विश्व का सबसे दुखी देश बताया गया है, जो 147वें स्थान पर है। इसके बाद सिएरा लियोन 146, लेबनान 145, मलावी 144 तथा जिम्बाब्वे 143 पर है।

दुनिया के कई ऐसे देशों को भी रैंकिंग में शामिल किया गया है जो युद्धग्रस्त हैं। इन देशों की रैंकिंग भी भारत से अच्छी नज़र आती है। इसमें यूक्रेन, फिलिस्तीन, इराक, ईरान जैसे देश भी शामिल हैं। इन देशों में राजनीतिक और आर्थिक मुद्दे भी हावी हैं।

दुनिया के 10 सबसे खुशहाल देश-
(1)फिनलैंड
(2) डेनमार्क
(3) आइसलैंड
(4) स्वीडन
(5) नीदरलैंड
(6) कोस्टा रिका
(7) नॉर्वे
(8) इजराइल
(9) लक्ज़मबर्ग
(10) मेक्सिको

रिपोर्ट में 2022 और 2024 के बीच 140 से अधिक देशों के लोगों के साथ किए गए वैश्विक सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। रैंकिंग के लिए प्रति व्यक्ति आय, जीवन प्रत्याशा, सामाजिक समर्थन, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार जैसे कारकों को ध्यान में रखा गया।

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