गुरु को दंगल में नहीं उतारना चाहते शिष्य, गृहनगर में ही हाशिए पर ‘नेताजी’

इटावा : समाजवादी पार्टी के सत्ता संग्राम में अगर किसी का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है तो वह जननायक मुलायम सिंह यादव। Mulayam

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आज मुलायम एक-एक जनसभा के लिए तरस रहे लेकिन उनके मुख्यमंत्री बेटे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी भी जनसभा में ले जाना तो दूर संबोधन कराना तक मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।

इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है वह भी बड़ी दिलचस्प है।

असल में मुलायम सिंह यादव अब चुके हुए नेताओं में माने जाने लगे हैं।

सपा का कोई भी नेता उनको अपने यहां नहीं बुलाना चाहता है इसी वजह से पार्टी ने उनको स्टार प्रचारक के तौर पर तो सामने रखा है लेकिन किसी भी सभा में ले जाना मुनासिब नहीं समझा जा रहा।

70 के दशक के बाद इटावा की राजनीति में यह पहला मौका है जब मुलायम का नाम चुनावी घमासान से दूर है। सपा की अभी तक जो सियासी लड़ाई मुलायम के इर्दगिर्द घूमती थी, उसका रुख इस बार अखिलेश बनाम शिवपाल के बीच झूल रहा है।

पहले चाहे कांग्रेस रही हो या बसपा या फिर भाजपा, सभी दलों के चुनावी समीकरण मुलायम सिंह यादव के सियासी गुणा-भाग को देखकर ही बनते बिगड़ते रहे हैं।

ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह स्थिति साफ हो गई है मुलायम सपा के प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार करने मैदान में आ रहे हैं।

इटावा में मुलायम के नाम पर एक बार फिर मतदाताओं का धु्रवीकरण कर शिवपाल बनाम अखिलेश की जंग को काफी कद तक नियंत्रित करने की तैयारी है।

सपा में डेमेज कंट्रोल के नाम पर मुलायम सिंह के नाम को आगे कर चुनावी हवा का रुख अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश शुरू हो गई है। यह सही है कि चार दशक से भी अधिक समय से मुलायम के नाम पर लड़ा जाने वाला चुनाव इस बार बगैर इस नाम के आधा अधूरा प्रतीत हो रहा।

मुलायम ने विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार की हामी भर दी है। आने वाले समय में सपा इसका भरपूर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगी।

सपा को मिली इन जीतों से मुलायम सिंह जिले की राजनीति के केंद्र बिंदु बनते गए। सदर सीट पर कभी जिस कांग्रेस का दबदबा रहा था, वह भी हाशिये पर सिमटती गई।

जिले में मुलायम के नाम पर चुनाव समीकरण फिट होते रहे। मगर इस बार सपा के अंदर मचे सियासी घमासान के चलते मुलायम जिले की चुनावी बिसात से बाहर दिखे।

उनके गृह जिले की सदर सीट से जहां अखिलेश यादव की सपा ने कुलदीप गुप्ता संटू को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है तो पूरे प्रकरण से नाखुश चल रहे शिवपाल सिंह यादव का आशीर्वाद लेकर मुलायम के लोग में शामिल आशीष राजपूत ने भी इसी सीट से लोकदल से पर्चा भरकर सपा की अंदरूनी खींचतान को जाहिर किया है।

अब मुलायम के चुनाव प्रचार में आने से एक बार फिर राजनीति की धुरी उनके इर्द गिर्द घूमती नजर आएगी। उनके सामने आने से सपा में चल रही अंदरूनी उठापटक पर भी काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।

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