अकसर नींद में ऐसा लगता है कि ऊंचाई से गिर रहे हैं और इस एहसास के साथ आंख अचानक खुल जाती हैं। यह अनुभव चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन ज़्यादातर मामलों में यह नॉर्मल होता है। इस स्थिति को हाइपनिक जर्क या स्लीप ऑनसेट कहते हैं।
हाइपनिक जर्क’ (hypnic jerk) शरीर की मांसपेशियों में होने वाले एक अचानक संकुचन है। यह मांसपेशियों में होने वाले झटकों का ही एक रूप है, जिसे ‘मायोक्लोनस’ (myoclonus) कहा जाता है। यह अवस्था आमतौर पर तब होती है जब कोई व्यक्ति जागने से नींद के शुरुआती दौर में होता है। यह एक तरह का बिना मरोड़ वाला मसल जर्क है जो स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है।
हाइपनिक जर्क में सोते समय झटके क्यों लगते हैं: हाइपनिक जर्क में शरीर की एक या ज़्यादा मसल्स अचानक थोड़े समय के लिए सिकुड़ जाती हैं। यह झटका पैरों, हाथों, कंधों या पूरे शरीर में महसूस हो सकता है। कभी-कभी, इससे व्यक्ति चौंककर जाग जाता है।
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जागने से सोने के दौरान दिमाग और मसल्स की एक्टिविटी बदल जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान, अचानक मसल्स में हलचल हो सकती है।
वैसे तो जानकार हाइपनिक जर्क को सो जाने के नॉर्मल प्रोसेस का हिस्सा मानते हैं।हालांकि, बार-बार आने वाले झटकों को सिर्फ़ स्ट्रेस या थकान समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यह अनुभव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों को बस अपने पैरों में झटका महसूस हो सकता है, जबकि दूसरों को ऐसा लग सकता है कि वे ऊंचाई से गिर रहे हैं। कुछ को आवाज़ जैसा एहसास या सपने जैसा अनुभव भी हो सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक़, नींद अचानक नहीं आती। शरीर धीरे-धीरे इस अवस्था में आता है। इस बदलाव के दौरान नर्वस सिस्टम की एक्टिविटी में बदलाव हिप्पोकैम्पल जर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। ये कभी-कभी होने वाले झटके आमतौर पर किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होते हैं।
किस कारण से समस्या और बढ़ सकती है: कुछ लोगों को सोते समय बार-बार शरीर में झटके महसूस होते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें स्ट्रेस, मेंटल स्ट्रेन, बहुत ज़्यादा थकान और पूरी नींद न लेना शामिल है।
साइंस डायरेक्ट में छपी रिसर्च रिव्यू में मेंटल स्ट्रेस, थकान और नींद की कमी को भी हाइपनिक जर्क बढ़ने के संभावित कारणों के तौर पर शामिल किया गया है। जब कोई व्यक्ति स्ट्रेस में होता है या सोते समय लगातार विचार करता रहता है, तो उसे सोने में मुश्किल हो सकती है, जिससे झटके लगने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आपको सोते समय कभी-कभी झटके लगते हैं, तो आमतौर पर चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। हालांकि, अगर झटके बार-बार आते हैं, नींद में खलल डालते हैं, समय के साथ बढ़ते हैं, या दूसरे अजीब लक्षणों के साथ आते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। अगर झटके जागते समय आते हैं या बेहोशी या कंट्रोल खोने के साथ आते हैं, तो मेडिकल जांच खास तौर पर ज़रूरी है। बल्कि बेहतर नींद के लिए कुछ आदतें अपनाने से मदद मिल सकती है।
कैफीन का सेवन कुछ लोगों में नींद आने और झटके लगने पर असर डाल सकता है। हालांकि, इसके कारण और असर सभी के लिए एक जैसे नहीं होते हैं।
हर दिन पूरी नींद लें और सोने और जागने का समय एक जैसा रखें।
स्ट्रेस कम करने के लिए सोने से पहले मेन्टल पीस पर काम करें।
शाम या रात में कैफीन लेना कम करें।
अगर आपको लगातार थकान महसूस हो रही है, तो आराम को प्राथमिकता दें।