विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि विकासशील देशों में 70 से 95 प्रतिशत आबादी, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए इन पौधों पर निर्भर है।

ये पौधे जहाँ एक ओर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका के आधार हैं वहीँ दुनिया का हर पाँच में से एक इनसान, जंगली पौधों, शैवाल और कवक (algae and fungi) पर भोजन और आय के लिए निर्भर है। ऐसे में इन पौधों का महत्व केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह जाता है।
बदलते परिवेश और आधुनिकता की दौड़ में इन पौधों के अस्तित्व का खतरा बना हुआ है। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य, धरोहर और जीवन यापन सुरक्षित रखने के बारे मेंं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2026 का विश्व वन्यजीव दिवस इन्हीं पौधों की अहमियत और उनके संरक्षण पर रौशनी डालेगा।
‘स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका’ जैसी महत्वपूर्ण खूबियों से जुड़े इन औषधीय व सुगन्धित पौधों के सामने आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विश्व वन्यजीव दिवस 2026 की थीम रखी गई है- “औषधीय और सुगन्धित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण।”
औषधीय और सुगन्धित खूबियों वाले ये पौधे केवल स्वास्थ्य और उपचार के आधार ही नहीं बल्कि आजीविका के साथ सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय सन्तुलन से भी जुड़े हैं। दुनिया भर में लोग बीमारियों की रोकथाम और उनके इलाज के लिए इन औषधीय व सुगन्धित पौधों की मदद लेते हैं। ये पौधे न केवल परम्परागत चिकित्सा के आधार हैं बल्कि आधुनिक दवाओं की जड़ भी इन्हीं में छिपी है।
परम्परा से आधुनिक दवाओं तक का सफर
आधुनिक दवाओं के कई सक्रिय तत्व या तो सीधे तौर पर या परोक्ष रूप से प्राकृतिक संसाधनों से लिये जाते हैं। आज भी सिंथेटिक और आधुनिक रसायन शास्त्र की प्रगति के बावजूद औषधीय पौधे दवा, सौन्दर्य पदार्थों, खाद्य और विलासिता उद्योगों का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
दुनिया भर में औषधीय व सुगन्धित पौधों की लगभग 50 से 70 हज़ार प्रजातियाँ, उनके औषधीय गुणों और सांस्कृतिक महत्व के लिए एकत्र की जाती हैं। इनमें से क़रीब 1300 प्रजातियाँ, वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों के अन्तरराष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन (CITES) की सूची में शामिल हैं।
इसके बावजूद यह जानकारी भी चिन्ताजनक है कि इनमें से कई प्रजातियाँ पर्यावरणीय क्षति (habitat loss) के अलावा अत्यधिक दोहन और अवैध व्यापार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
साथ ही प्रकृति संरक्षण के लिए अन्तरराष्ट्रीय संघ (IUCN) की लाल सूची बताती है कि दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली 20 प्रतिशत से ज़्यादा औषधीय प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं।
विश्व वन्यजीव दिवस 2026 के अवसर पर विभिन्न संगठनों के सहयोग से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही जागरूकता बढ़ाने और ज्ञान साझा करने के तहत, इन औषधीय व सुगन्धित पौधों (MAPs) की महत्ता, उनकी भूमिका और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर संवाद आयोजित होंगे।
इसके अलावा अनुसन्धान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थाई उपयोग के तरीक़ों और सफल संरक्षण उदाहरण साझा किए जाएंगे, ताकि इन पौधों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग की दिशा में ठोस क़दम उठाए जा सकें।















