म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में अमरीकी विदेश मंत्री का भाषण इस समय दुनिया का ध्यान खींच रहा है। कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए मार्को रुबियो ने इसे ‘नई वेस्टर्न सदी’ बनाने की बात कही है। रुबियो का यह बयान, अमरीकी आर्मी के वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़े जाने तथा देश के एनर्जी ट्रेड पर कंट्रोल करने के कुछ सप्ताह बाद आया है।

जहाँ एक ओर रूबियो का बयान शेष दुनिया को सतर्क किया है, वहीँ यह सवाल भी सामने आता है कि क्या ग्लोबल साउथ आर्थिक दबदबे के नए दौर का सामना कर रहा है। रुबियो के बयान को जानकर ट्रंप प्रशासन की ईस्ट इंडिया की तरह से कॉलोनाइजेशन की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। इन जानकारों के मुताबिक़, यह बयान 18वीं और 19वीं सदी में यूरोपियन ताकतों के बाज़ार और कच्चे माल की रेस में एशिया और अफ्रीका को बांटकर अपनी कॉलोनी बनाने की याद दिलाता है।
ग्लोबल साउथ से अर्थ विकासशील देशों के ग्रुप से है, जो मुख्य रूप से एशिया और ओशिनिया के हिस्से हैं। गौरतलब है कि एशिया और ओशिनिया मिलकर विश्व का एक विशाल भू-राजनीतिक क्षेत्र बनाते हैं, जो प्रशांत महासागर के पश्चिमी तट पर स्थित है। एशिया सबसे बड़ा महाद्वीप है, जबकि ओशिनिया प्रशांत महासागर में फैले द्वीपों का समूह है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और प्रशांत द्वीप शामिल हैं। इस क्षेत्र को अक्सर भारत-प्रशांत के रूप में जाना जाता है, जो व्यापार और भू-राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
जानकारों के मुताबिक़, रूबियो का यह कहना, यह भी याद दिलाता है कि ग्लोबल साउथ के बड़े हिस्से के कॉलोनी बनने के जख्म अभी ताजा हैं। इससे इसे सीधे अमरीका लीड करना चाहता है। रुबियो वेस्ट से फिर से मुकाबला करने के साथ ग्लोबल साउथ की इकॉनमी में मार्केट शेयर जीतने का ज़िक्र करते हुए सख्त बॉर्डर, इंडस्ट्री को फिर से शुरू करने और राष्ट्रीय संप्रभुता को फिर से लागू करने की मांग करते हैं।
गौरतलब है कि म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस, दुनिया के असरदार फोरम के रूप में फॉरेन और सिक्योरिटी पॉलिसी का एक ऐसा मंच है जहाँ 70 से ज्यादा देशों के सैकड़ों हेड ऑफ स्टेट, मिनिस्टर, मिलिट्री चीफ, डिप्लोमैट और पॉलिसी एक्सपर्ट इस मंच से ग्लोबल सिक्योरिटी चैलेंज पर चर्चा करते हैं।
जियोपॉलिटिकल कमेंटेटर अर्नॉड बर्ट्रेंड, रुबियो के इस भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सबसे ज्यादा इंपीरियलिस्ट भाषणों में से एक बताते हैं।इस संबंध में अपने विचार रखते हुए जर्नलिस्ट जेसन जहरिस का कहना है कि रुबियो के भाषण से नहीं लगता है कि वेस्टर्न ब्लॉक सभ्य है या इंटरनेशनल लॉ और डेमोक्रेसी के सिद्धांतों को मानता है।












