विश्व साइकिल दिवस पर इसके रोचक इतिहास को जानें

सायकिल आज नए और पुराने दौर के बीच की एक कड़ी की तरह जानी जाती है। हालाँकि आज के हाईटेक युग में तमाम वस्तुएं धरोहर बनती जा रही हैं, मगर सायकिल ने आज भी अपनी अहमियत बनाए रखी है। नहीं कुछ तो सेहत के ही हवाले से इसका इस्तेमाल घर घर में हो रहा है।

विश्व साइकिल दिवस पर इसके रोचक इतिहास को जानें

साइकिल की खूबियों को मद्देनज़र रखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से हर वर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है।

सुविधाजनक होने के साथ यह स्वास्थ्य और प्रदूषण के लिए भी कारगर है। इनकी विशेषताओं के कारण इसे नीदरलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, जापान और बेल्जियम जैसे विकसित देशों में साइकिल का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमरीकी समाजशास्त्री एवं प्रोफेसर लेसजेक सिबिल्स्की ने साल 2015 में पोलिश सायकिल की खूबियों और इससे होने वाले सामाजिक एवं पर्यावरणीय लाभ को देखते हुए इसे लेकर एक वैश्विक अभियान शुरु किया।

लेसजेक सिबिल्स्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 12 अप्रैल 2018 को विश्व साइकिल दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद 193 देशों के समर्थन के साथ 3 जून 2018 को पहली बार इतने ही देश के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में विश्व साइकिल दिवस मनाया गया। तभी से 3 जून को दुनिया भर में विश्व साइकिल दिवस मनाया जा रहा है।

नीदरलैंड ‘साइकिलों का देश’ कहलाता है, वैसे तो भारत में भी साइकिल सवारी लोगों को पसंद है। हालाँकि इसके रूप बदलते रहे हैं और आज एक से एक आधुनिक तकनीक युक्त सायकिलें बाज़ार में हैं।

जेब, पर्यावरण और सेहत का ख़याल रखने वाली सायकिल अपनी खूबियों के बल पर आज तक अपनी मौजूदगी बनाए है और आने वाले समय में भी बनाए रहेगी।

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