‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पारित कराना सरकार के लिए आसान नहीं

आज लोकसभा में संविधान संशोधन बिल ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पेश किया गया इसे कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया।

'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल पारित कराना सरकार के लिए आसान नहीं

वन नेशन, वन इलेक्शन संशोधन बिल को पारित कराना सरकार के लिए बड़ा मसला बनता नज़र आ रहा है। इसमें फंसने वाला पेंच एनडीए के पास दो तिहाई बहुमत का नहीं होना है।

दरअसल संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसे पास कराने के लिए दोनों सदनों से दो-तिहाई सदस्यों का बहुमत मिलना चाहिए साथ ही मतदान में 50 फीसद से अधिक वोट मिलने चाहिए। ऐसे में बाक़ी सदस्यों का मूड देखें तो पाते हैं कि इंडिया गठबंधन के सभी सदस्य इस संशोधन के विरोध में हैं।

एनडीए के पास लोकसभा की 543 सीटों में से अभी 292 सीटें हैं। दो तिहाई बहुमत के लिए उसे 362 का आंकड़ा चाहिए। वहीं राज्यसभा की 245 सीटों में एनडीए के पास इस समय 112 सीटें हैं साथ ही अन्य 6 मनोनीत सांसदों का भी समर्थन है। दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटों की ज़रूरत है। यहाँ विपक्ष के पास 85 सीटें हैं।

बताते चलें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस साल सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में सिलसिलेवार तरीके से लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए एक साथ चुनाव कराने हेतु ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के कार्यान्वयन को मंजूरी दी थी।

दरअसल इस बिल के माध्यम से सरकार की मंशा यह है कि पूरे देश में एक चुनाव कराया जाए। इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ विधेयक को मंजूरी दी थी।

हालाँकि बीजेपी और उसके सहयोगी दल संशोधन विधेयक के समर्थन में हैं ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर में एक साथ चुनाव कराने संबंधी उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को मंज़ूर करते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इस समिति की अध्यक्षता सौंपी थी।

बताते चलें कि इस मामले में रामनाथ कोविंद समिति को 47 राजनीतिक दलों ने अपनी राय दी थी। इनमें से जहाँ 32 दलों ने समर्थन दिया था वहीँ 15 दलों ने इसका विरोध किया था।

बिल का विरोध करने वालों दलों के लोकसभा सदस्यों की संख्या 205 है। ऐसे में इंडिया गठबंधन के समर्थन के बग़ैर संविधान संशोधन बिल पारित होना मुश्किल है।

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