सूट जैकेट, जिसे आमतौर पर कोट कहा जाता है, दुनिया के लगभग सभी देशों में पहना जाता है। इस कोट का एक खास डिज़ाइन होता है जिसका पालन पूरी दुनिया में किया जाता है और इसके डिज़ाइन में एक अजीबोगरीब विशेषता भी शामिल है जिसे ‘सूट वेंट’ कहा जाता है।

दरअसल, कोट के पीछे एक-दो जगहों पर कट लगाए जाते हैं, जिन्हें सूट वेंट कहा जाता है, और कई लोगों ने सोचा होगा कि कोट को पीछे से इस तरह क्यों काटा जाता है?
इनका सबसे अहम् मक़सद गतिशीलता को बरक़रार रखना, आराम देना और बैठने या चलते समय जैकेट के अच्छी तरह से फिट होने में मदद करना है।
कोट को पीछे से काटने का चलन उस दौर में शुरू हुआ जब लोग घुड़सवारी के आदी थे। उस ज़माने में लोगों को ऐसा कोट पहनकर घूमना आसान लगता था और घोड़े पर बैठने के बाद कोट के फटने का कोई खतरा नहीं होता था। सिलाई की कारीगरी के आधार पर कोट के इस अंदाज़ को तीन नामों से जाना जाता है।
सिंगल वेंट: जैकेट के पीछे के निचले मध्य भाग में एक ही कट होता है। इसे आम शैली में रखते हैं।
डबल वेंट: जैकेट के पीछे के निचले-दाएं और निचले-बाएं दोनों तरफ दो कट होते हैं। यह भी सबसे आम शैली है।
नो वेंट: इसमें कोई वेंट या कट नहीं होता, जो कि कम लोकप्रिय है। लेकिन फैशन की लहार इन तीनों के चलन को निर्धारित करती है।
आज के आधुनिक युग में भी, जब घुड़सवारी आम बात नहीं है, कोट के डिजाइन में इस विशेषता को बनाए रखने का कारण यह है कि इससे चलते या बैठते समय कोट तंग महसूस नहीं होता है और इससे पहनने वाला सहज महसूस करता है।













