न्यूयॉर्क में 28 से 30 जुलाई तक उच्च-स्तरीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनआयोजित किया गया। इसमें फ़लस्तीन मामले में शान्तिपूर्ण समाधान और दो-देश समाधान को वास्तविकता में बदलने पर बात की गई। इस उच्च-स्तरीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में संयुक्त राज्य अमरीका और इसराइल ने भाग नहीं लिया।

इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में तीन दिनों की आम बहस में, 125 से ज़्यादा वक्ताओं ने अपनी बात रखी, जिनमें दुनिया भर के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) व अन्तरराष्ट्रीय रैडक्रॉस समिति (ICRC) जैसे प्रमुख क्षेत्रीय और अन्तरराष्ट्रीय संगठन शामिल थे।
फ़्रांस और सऊदी अरब ने इस सम्मेलन के सह-अध्यक्ष के रूप में सभी यूएन सदस्य देशों से ग़ाज़ा में युद्ध को समाप्त करने और इसराइल-फ़लस्तीनी टकराव का न्यायसंगत, शान्तिपूर्ण और स्थाई समाधान निकालने के लिए, सामूहिक कार्रवाई का आग्रह करने वाले एक घोषणा-पत्र का समर्थन करने का आहवान किया।
“एक-राष्ट्र की वास्तविकता जहाँ फ़लस्तीनियों को समान अधिकारों से वंचित किया जाता है और उन्हें निरन्तर क़ब्ज़े व असमानता के अधीन रहने के लिए मजबूर किया जाता है? एक-देश की वास्तविकता जहाँ फ़लस्तीनियों को उनकी भूमि से बेदख़ल किया जाता है? यह शान्ति नहीं है। यह न्याय नहीं है। और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”- यूएन महासचिव
फ़लस्तीन प्रश्न के शान्तिपूर्ण समाधान और दो-राष्ट्र समाधान को लागू किए जाने पर न्यूयॉर्क घोषणा-पत्र में समयबद्ध तौर पर ऐसे राजनैतिक, मानवीय और सुरक्षा सम्बन्धी क़दमों की रूपरेखा दी गई है, जिन्हें बदला नहीं जा सके।
सह-अध्यक्षों ने देशों से आग्रह किया कि यदि वे चाहें तो महासभा के 79वें सत्र के अन्त तक इस घोषणा-पत्र का समर्थन कर सकते हैं। यह सत्र सितम्बर के दूसरे सप्ताह में आरम्भ होगा।
सोमवार को अपने स्पष्ट उदघाटन भाषण में यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि दो-देश समाधान ही लम्बे समय से चले आ रहे टकराव को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थाई शान्ति प्राप्त करने का एकमात्र कारगर मार्ग है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
भाषण में यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा- “एक-राष्ट्र की वास्तविकता जहाँ फ़लस्तीनियों को समान अधिकारों से वंचित किया जाता है और उन्हें निरन्तर क़ब्ज़े व असमानता के अधीन रहने के लिए मजबूर किया जाता है? एक-देश की वास्तविकता जहाँ फ़लस्तीनियों को उनकी भूमि से बेदख़ल किया जाता है? यह शान्ति नहीं है। यह न्याय नहीं है। और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”
उन्होंने इसराइल पर हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमलों और उसके बाद इराइल के सैन्य हमलों की व्यापकता की निन्दा की, और तत्काल एवं स्थाई युद्धविराम, बन्धकों की बिना शर्त रिहाई और मानवीय सहायता की बेरोकटोक आपूर्ति की अपनी अपील दोहराई।
दो-देश समाधान को साकार करने के लिए प्रतिनिधियों ने ठोस क़दम उठाने की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया, और फ़लस्तीनी प्राधिकरण को सशक्त बनाने व उसमें सुधार करने, गाज़ा के पुनर्निर्माण और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघनों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को उजागर किया।
सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करने वाले फ्रांस के प्रतिनिधि ने, इसराइल को देशों के समुदाय में शामिल किए जाते समय अपने देश के समर्थन को याद किया और ज़ोर दिया कि फ़लस्तीनियों को भी मातृभूमि का समान अधिकार प्राप्त है।
फ़्रांस के योरोप के लिए और विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा- “ऐसे समय में जब दो-राष्ट्र समाधान पहले से कहीं अधिक ख़तरे में है, फ्रांस फ़लस्तीन राष्ट्र को पूर्ण मान्यता देने के लिए तैयार है।” उन्होंने आगे कहा कि यह मान्यता सितम्बर में तब दी जाएगी, जब विश्व के नेतागण, यूएन महासभा के 80वें सत्र के लिए फिर से एकत्रित होंगे।
सह-अध्यक्ष सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान अल सऊद ने, ग़ाज़ा में इसराइल की बमबारी के बीच लाखों लोगों की पीड़ा की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया, जबकि येरूशेलम और पश्चिमी तट में आबादी के ढाँचे को बदलने के लिए, वहाँ इसराइली यहूदी बस्तियाँ फैलाई जा रही हैं।
ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी ने, अपने देश की हालिया कार्रवाइयों का ज़िक्र किया – जिसमें हथियारों के निर्यात पर रोक व यहूदी चरमपंथी बाशिन्दों पर प्रतिबन्ध, और फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी – UNRWA को धनराशि बहाल करना शामिल है।
उन्होंने घोषणा की- “हमारे कन्धों पर इतिहास का हाथ होने की पृष्ठभिमि के साथ, महामहिम (सम्राट) की सरकार सितम्बर में न्यूयॉर्क में यूएन महासभा की बैठक में, फ़लस्तीन राष्ट्र को मान्यता देने का इरादा रखती है।”
“अगर इसराइल सरकार, ग़ाज़ा में भयावह स्थिति को समाप्त करने के लिए कार्रवाई नहीं करती, अपना सैन्य अभियान समाप्त नहीं करती और दो-देश समाधान पर आधारित दीर्घकालिक स्थाई शान्ति के लिए प्रतिबद्ध नहीं होती, तो हम ऐसा करेंगे। “
















