चेन्नई में आयोजित स्क्वैश वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में भारतीय टीम ने टॉप सीड हांगकांग, चीन को 3-0 से करारी शिकस्त दी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में यह भारत का पहला खिताब है। प्रधानमंत्री मोदी ने टीम को बधाई देते हुए इसे गौरव का पल बताया।

भारत स्क्वैश वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला एशियाई देश बन गया है। भारत को इससे पहले 2023 में कांस्य पदक मिला था, लेकिन इस बार टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया और शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। फाइनल मुकाबला चेन्नई के एक्सप्रेस एवेन्यू मॉल में खेला गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “एसडीएटी स्क्वैश वर्ल्ड कप 2025 में इतिहास रचने और अपना पहला वर्ल्ड कप टाइटल जीतने के लिए भारतीय स्क्वैश टीम को बहुत-बहुत बधाई! जोशना चिनप्पा, अभय सिंह, वेलवन सेंथिल कुमार और अनाहत सिंह ने जबरदस्त लगन और पक्का इरादा दिखाया है। उनकी सफलता ने पूरे देश को गर्व महसूस कराया है। इस जीत से हमारे युवाओं के बीच स्क्वैश की लोकप्रियता भी बढ़ेगी।”
पहले मैच में जोशना चिनप्पा ने हांगकांग की का यी ली को 3-1 (7-3, 2-7, 7-5, 7-1) से शिकस्त देते हुए भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। अनुभव के बल पर 39 वर्षीय जोशना ने अपनी बेहतरीन कोर्टक्राफ्ट का शानदार प्रयोग किया। इसके बाद भारत के नंबर-1 पुरुष खिलाड़ी अभय सिंह ने एलेक्स लाउ को सीधे सेटों में 3-0 (7-1, 7-4, 7-4) से मात देकर स्कोर 2-0 कर दिया।
निर्णायक मैच में 17 साल की युवा स्टार अनाहत सिंह ने टोमाटो हो को 3-0 (7-2, 7-2, 7-5) से हराकर जीत पक्की की। अनाहत टूर्नामेंट की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं और उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा। वेलवन सेंथिल कुमार भी टीम का हिस्सा थे, हालांकि फाइनल में उनकी जरूरत नहीं पड़ी।
भारत ने इस टूर्नामेंट में ग्रुप स्टेज में स्विट्जरलैंड और ब्राजील को 4-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 3-0 और सेमीफाइनल में दो बार के डिफेंडिंग चैंपियन मिस्र को 3-0 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई। पूरी टीम ने लगन, इरादा और टीमवर्क का बेहतरीन नमूना पेश किया।
बताते चलें कि इस टूर्नामेंट में 12 देशों ने हिस्सा लिया था, जिनमें ऑस्ट्रेलिया सहित मिस्र, हांगकांग, जापान, मलेशिया, ईरान, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका और स्विट्जरलैंड जैसे मजबूत देश थे। स्क्वैश वर्ल्ड कप की शुरुआत 1996 में हुई थी और अब तक ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और मिस्र जैसी टीमें इस खिताब को अपने नाम कर चुकी हैं।














