ग्लोबल हंगर इंडेक्स की 122 देशों की सूची में भारत 100वें स्थान पर है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स चार पैमानों को मिलाकर बनता है: कुपोषण, बच्चों में स्टंटिंग, बच्चों में वेस्टिंग और बाल मृत्यु दर। इसका उद्देश्य समय के साथ भूख की स्थिति पर नज़र रखना और अलग-अलग देशों व क्षेत्रों के बीच तुलना। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 9.8 प्रतिशत आबादी कुपोषण से जूझ रही है।
आउटलुक इंडिया डॉट कॉम की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत की 9.8 प्रतिशत आबादी कुपोषण का शिकार है और बच्चों में ‘वेस्टिंग’ की दर 19 प्रतिशत है। बच्चों में ‘स्टंटिंग’ 29.3 प्रतिशत है, जबकि 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई।
इस इंडेक्स को जर्मनी की ‘वेल्थुंगरहिल्फे’ (Welthungerhilfe) और आयरलैंड की ‘कंसर्न वर्ल्डवाइड’ (Concern Worldwide) मिलकर जारी करती हैं। इनके साथ ‘इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल लॉ ऑफ पीस एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट’ और स्विट्जरलैंड की ‘हेल्वेटास’ (Helvetas) जैसी सहयोगी संस्थाएं भी शामिल हैं।
2026 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) में 122 देशों के बीच भारत 100वें स्थान पर है, जो पाकिस्तान (106वें स्थान) से बेहतर है। इस इंडेक्स के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में ‘स्टंटिंग’ 29.3 प्रतिशत और ‘वेस्टिंग’ 19 प्रतिशत है। भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 2.7 प्रतिशत रही। दक्षिण एशिया का ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्कोर 23.5 रहा, जबकि वैश्विक स्कोर 18.1 था।
भारत का स्कोर 24.1 है, जो इसे ‘गंभीर’ भुखमरी की श्रेणी में रखता है। इस मामले में भारत नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से पीछे है, लेकिन पाकिस्तान से आगे है। नेपाल का स्कोर 2018 के 18.4 से सुधरकर 2026 में 14.5 हो गया है, यानी इसमें 3.9 अंकों की कमी आई है। वहीं, भारत के स्कोर में 1.7 अंकों की कमी आई है। श्रीलंका का स्कोर 11.4 से घटकर 10.2 हो गया, जबकि बांग्लादेश का स्कोर 20.0 से घटकर 19.2 हो गया। ये दोनों देश ‘मध्यम’ (moderate) श्रेणी में बने हुए हैं।
इसी अवधि के दौरान पाकिस्तान का स्कोर 24.0 से बिगड़कर 25.5 हो गया है। यह 106वें स्थान पर रहा, जबकि भारत 100वें स्थान पर था। बच्चों के पोषण के मामले में भी बांग्लादेश का प्रदर्शन भारत से बेहतर रहा। बांग्लादेश में ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ (उम्र के हिसाब से बहुत कम वजन) 12.9 प्रतिशत थी, जबकि भारत में यह 19 प्रतिशत थी। वहीं, ‘स्टंटिंग’ (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) बांग्लादेश में 24 प्रतिशत थी, जबकि भारत में यह 29.3 प्रतिशत थी। बांग्लादेश की 8.2 प्रतिशत आबादी कुपोषण (अंडरनरिश्मेंट) से प्रभावित थी, जबकि भारत में यह आंकड़ा 9.8 प्रतिशत था।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स चार पैमानों को मिलाकर बनता है: कुपोषण, बच्चों में स्टंटिंग, बच्चों में वेस्टिंग और बाल मृत्यु दर। इसका उद्देश्य समय के साथ भूख की स्थिति पर नज़र रखना और अलग-अलग देशों व क्षेत्रों के बीच तुलना करना है।
‘कुपोषण’ (अंडरनरिश्मेंट) से पता चलता है कि कितने लोगों को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल रही है। ‘स्टंटिंग’ का मतलब है 5 साल से कम उम्र के बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के हिसाब से कम होना, जबकि ‘वेस्टिंग’ का मतलब है लंबाई के हिसाब से वजन बहुत कम होना। ‘बाल मृत्यु दर’ में 5 साल की उम्र पूरी होने से पहले होने वाली बच्चों की मौतों को शामिल किया जाता है।
कुल स्कोर में शामिल करने से पहले, हर पैमाने को कुछ तय मानकों (बेंचमार्क) के आधार पर मापा जाता है। ये मानक 1988 के बाद से दुनिया भर के देशों में दर्ज किए गए सबसे खराब आंकड़ों से भी थोड़े ऊपर रखे गए हैं।
केंद्र सरकार ने कार्यप्रणाली (मेथडोलॉजी) पर सवाल उठाए हैं
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने 5 अगस्त, 2026 को राज्यसभा में एक जवाब के दौरान इस इंडेक्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे “3 गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा तैयार किया गया एक निजी ढांचा” बताया।
उन्होंने कहा कि इसके चार पैमानों में से तीन “असल में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के स्तर से जुड़े हैं” और ये “पूरी आबादी में भूख की स्थिति को नहीं दर्शाते हैं”।
ठाकुर ने ‘कुपोषण’ (अंडरनरिश्मेंट) वाले पैमाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि “इसमें कार्यप्रणाली और डेटा से जुड़ी गंभीर कमियां हैं”। उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यप्रणाली “भरोसेमंद नहीं है और इसे पूरी आबादी में भूख की स्थिति बताने वाला पैमाना नहीं माना जा सकता”।
सरकार ने खाद्य और पोषण योजनाओं का जिक्र किया
ठाकुर ने सरकारी कार्यक्रमों की पहुंच का हवाला देते हुए बताया कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत लगभग 79.09 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह योजना “ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत तक और शहरी आबादी के 50 प्रतिशत तक के लोगों की भोजन संबंधी जरूरतों को काफी हद तक पूरा करती है”।
उनके जवाब के अनुसार, ‘पीएम पोषण’ (PM POSHAN) योजना के तहत 10.36 लाख स्कूलों के लगभग 11.20 करोड़ बच्चे आते हैं। उन्होंने आगे बताया कि ‘मिशन पोषण 2.0’ (Mission Poshan 2.0) के जरिए 18 से अधिक मंत्रालयों/विभागों के बीच आपसी तालमेल बिठाकर कुपोषण की समस्या से निपटा जा रहा है।
मंत्री ने ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ (National Family Health Survey) के नतीजों का भी जिक्र किया, जो दिखाते हैं कि देश भर में बच्चों के कुपोषण से जुड़े संकेतकों में सुधार हुआ है।