निमोनिया बच्चों के लिए जानलेवा बीमारी हो सकती है और दुनिया भर में इससे होने वाली मौतों की दर भी बहुत ज़्यादा है। निमोनिया को दुनिया भर में बच्चों में मौत का सबसे बड़ा संक्रामक कारण माना जाता है। अकेले 2019 में, निमोनिया के कारण पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों की मृत्यु का 14% हिस्सा था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर माता-पिता समय पर लक्षणों को पहचान लें, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती है।

निमोनिया एक आम फेफड़ों का इंफेक्शन है, जिससे मरीज को आसानी से सांस लेने में दिक्कत होती है। यह संक्रमण वायरस, कवक या बैक्टीरिया के कारण होता है, जो फेफड़ों में हवा की थैलियों को कफ या बलगम से भर देता है।
अगर समय पर और सही उपचार न किया जाए तो यह जानलेवा बीमारी हो सकती है। बच्चों में निमोनिया के कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।
तेज़ या मुश्किल से सांस लेना, सांस लेते समय छाती अंदर खींचना। तेज़ बुखार, लगातार या बार-बार बुखार आना। तेज़ खांसी जो समय के साथ और बिगड़ जाए।
सुस्ती और कमज़ोरी, बच्चा अजीब तरह से शांत या सुस्त दिख सकता है।
दूध या खाना न खाना, यह लक्षण खासकर छोटे बच्चों में ज़्यादा दिखता है।
होंठ या नाखून नीले पड़ना, यह ऑक्सीजन की कमी का संकेत है।
सीने में दर्द, घरघराहट या दर्द की वजह से बच्चे का कराहना।
बच्चों में होने वाला निमोनिया अलग-अलग प्रकार का होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि इसका कारण क्या है, यह शरीर को कहां प्रभावित करता है। यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो तो इंफेक्शन बिगड़ने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय पर इलाज से ही बच्चे की जान बचाई जा सकती है।














