हान कांग ने वैश्विक युद्धों का हवाला देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और जश्न मनाने से इंकार कर दिया

साहित्य में 2024 की नोबेल पुरस्कार विजेता हान कांग ने कथित तौर पर व्यक्त किया है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित नहीं करेंगी।

हान कांग ने वैश्विक युद्धों का हवाला देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और जश्न मनाने से इंकार कर दिया

वैश्विक युद्धों का हवाला देते हुए हान कांग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और जश्न मनाने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि युद्ध में लोगों की मौत के बीच पुरस्कार का जश्न नहीं मानना चाहेंगी।


हान कांग का कहना है कि युद्ध में लोगों की मौत के बीच पुरस्कार का जश्न नहीं मानना चाहेंगी। साथ ही उन्होंने इस मामले में समझ की माँग की है।


हान कांग के नज़रिए के बारे में बताते हुए उनके पिता ने कहा- “उसका दृष्टिकोण कोरिया में रहने वाले एक लेखक से बदलकर अब और वैश्विक हो चुका है। उसका कहना है कि रूस और यूक्रेन, इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे युद्धों के साथ हर दिन मौतों की रिपोर्ट के साथ, वह एक जश्न मनाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकती।” पिता ने आगे कहा कि उसने इस मामले में समझ की माँग की है।

बताते चलें कि शुक्रवार को नोबेल पुरस्कार समिति के साथ एक संक्षिप्त फ़ोन साक्षात्कार के बाद हान ने आगे कोई टिप्पणी नहीं की। उनके उपन्यासों के प्रकाशक – मुन्हाकडोंगने पब्लिशिंग ग्रुप और चांगबी पब्लिशर्स ने कहा कि अभी तक चीजें तय नहीं हुई हैं।

इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार साउथ कोर‍िया की लेख‍िका हान कांग को दिया गया है। हान कांग इंसानी जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव को अपने लेखन के जर‍िये अनूठे अंदाज़ में बयान करती हैं, शैली की ही सुंदरता उन्‍हें इस सम्‍मान का हक़दार बनाती है।

गौरतलब है कि 53 साल की फिक्शन राइटर हान कांग बुकर पुरस्‍कार भी जीत चुकी हैं। साल 2007 में उपन्यास ‘द वेजीटेरियन’ के लिए उन्‍हें मैन बुकर इंटरनेशनल पुरस्कार से सम्‍मान‍ित क‍िया गया था। ‘द वेजिटेरियन’ एक ऐसा उपन्यास है जिसमें एक महिला के मांस खाना बंद करने के फैसले के विनाशकारी परिणाम बताए गए हैं।

हान कांग इस अवार्ड को जीतने वाली पहली दक्षिण कोरियाई मह‍िला भी हैं, ज‍िन्‍हें यह सम्‍मान मिला है। इसके अलावा वह यह सम्मान पाने वाली 18वीं महिला हैं।

यह दूसरी बार है जब किसी कोरियाई नागरिक को नोबेल पुरस्कार मिला है, अबसे 24 साल पहले 2000 में पूर्व राष्ट्रपति किम डे-जंग को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।

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