लंदन में अमरीकी दूतावास के बाहर इजरायली अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में फव्वारे का पानी हुआ लाल

ब्रिटिश राजधानी लंदन में अमरीकी दूतावास के बाहर इजरायली अत्याचारों के खिलाफ एक अनोखा विरोध प्रदर्शन दर्ज किया गया। यहाँ प्रदर्शनकारियों ने एक तालाब या फव्वारे में लाल रंग डाल दिया, जिससे वह खून के रंग में बदल गया।

लंदन में अमरीकी दूतावास के बाहर इजरायली अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में फव्वारे का पानी हुआ लाल

ग्रीनपीस यूके के कार्यकर्ताओं ने लंदन में अमरीकी दूतावास के बाहर इज़रायल के खिलाफ प्रदर्शन किया। विरोध दर्ज कराने के लिए इन प्रदर्शनकारियों ने के तालाब में रंग डाल कर इसे खून जैसा बना दिया।

लाल रंग गाजा में हुई मौतों और तबाही को दर्शाता है, जो अमरीका द्वारा इजरायल को हथियार, गोला-बारूद और सैन्य हार्डवेयर की निरंतर बिक्री के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में हुआ है। ग्रीनपीस यूके अमरीका और ब्रिटेन की सरकारों से इजरायल को हथियार बेचने को तुरंत बंद करने का आग्रह कर रहा है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “इज़राइल को हथियार देना बंद करो”, “आपके हाथों पर खून” और “फिलिस्तीन को आज़ाद करो” जैसे नारे लिखे हुए तख्तियां और बैनर पकड़ रखे थे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह लाल रंग गाजा में बह रहे निर्दोष फिलिस्तीनियों के खून का प्रतीक है, जिसे दुनिया नजरअंदाज कर रही है।

लंदन में अमरीकी दूतावास के बाहर इजरायली अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने एक तालाब या फव्वारे में लाल रंग डाल दिया, जिससे वह खून के रंग में बदल गया। ग्रीनपीस यूके अमरीका और ब्रिटेन की सरकारों से इजरायल को हथियार बेचना तुरंत बंद करने का आग्रह कर रहा है।

इस प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राज्य अमरीका पर इस अत्याचार में शामिल होने का आरोप लगाया है। इन लोगों का कहना है कि वह न केवल इजरायल को राजनीतिक बल्कि सैन्य सहायता भी प्रदान कर रहा है।

इस प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की इस गतिविधि को दुनियाभर में न सिर्फ हैरत के साथ देखा जा रहा है बल्कि इन्हें विश्व स्तर पर जनता की सहानुभूति और समर्थन भी मिल रहा है।

बताते चलें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के भयानक हमलों और इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद से गाजा में 50,000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे हैं। इजरायल सरकार ने ज़रूरी मदद रोक दी है, जबकि स्कूलों, अस्पतालों और शरणार्थी शिविरों पर बमबारी की गई है। इजरायल का युद्ध अमेरिका के हथियारों पर निर्भर करता है।

ग्रीन पीस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अमरीका इजरायल के सभी हथियारों के आयात का दो-तिहाई हिस्सा सप्लाई करता है। ब्रिटेन भी इसके लिए ज़िम्मेदार है। ब्रिटेन सरकार ने 2015 से इजरायल को लगभग 500 मिलियन पाउंड का सैन्य हार्डवेयर बेचा है। इसने पिछले साल सितंबर में इजरायल को दिए गए अपने 350 हथियारों के निर्यात लाइसेंस में से 30 को निलंबित कर दिया था। लेकिन यह काफी नहीं था।

रिपोर्ट के मुताबिक़, अमरीका ने फरवरी में युद्ध विराम लागू करके दिखाया कि उसके पास हत्या को रोकने की शक्ति है। लेकिन इजराइल द्वारा युद्ध विराम तोड़ने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप इजरायल को हथियार सप्लाई करते रहे, जनवरी से अब तक लगभग 12 बिलियन डॉलर की सैन्य बिक्री को मंजूरी दी है। इजराइल के कुल हथियार आयात का दो-तिहाई हिस्सा अमरीका सप्लाई करता है। इजरायल का युद्ध अमरीका के हथियारों पर निर्भर करता है।

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