संसद ने बुधवार को इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई यानि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सौ फीसद तक बढ़ाने के प्रावधान वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि इस कदम से देश के बीमा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। विपक्ष के संशोधनों को खारिज कर दिया गया। इस मंज़ूरी के साथ ही विपक्ष के संशोधनों को खारिज कर दिया गया।

आम लोगों और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले इस विधेयक को ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ नाम दिया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को मजबूती मिलेगी। लोकसभा की ओर से एक दिन पहले पारित किए जाने के बाद राज्यसभा ने भी इस विधेयक को ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया।
राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीमा क्षेत्र में अब तक 12 बार संशोधन हो चुके हैं, जो देश की तरक्की और बीमा क्षेत्र की बदलती जरूरतों को दर्शाते हैं। विपक्ष की तरफ से विधेयक पारित कराने में जल्दबाजी करने के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इस संबंध में लगभग दो साल तक गहन विचार-विमर्श किया गया है।
सरकार का मानना है कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इसे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और देश के आर्थिक विकास में योगदान करने में मदद करेगा। वित्त मंत्री ने बताया कि इससे बीमा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, सार्वजनिक कंपनियों को मजबूती मिलेगी और आम लोगों व किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे के अलावा बेहतर तकनीक उपलब्ध होगी।
सीतारमण ने कुछ विपक्षी सदस्यों के इस दावे को भी गलत बताया कि प्रीमियम की राशि विदेशी कंपनियों के पास चली जाएगी।वित्तमंत्री के अनुसार, बीमा क्षेत्र को खोलने से बेहतर तकनीक और बेहतर उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे बीमा एजेंटों को भी लाभ मिलेगा।
वित्त मंत्री ने इस नए विधेयक के हवाले से बताया कि इसमें आम लोगों और किसानों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सौ फीसद एफडीआई की अनुमति से देश के बीमा क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रावधान किए गए हैं।
वित्त मंत्री के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बीमा कंपनियों की स्थिति सुधारने के लिए 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा, जिन्हें पहले संयुक्त उद्यम सहयोगी खोजने में कठिनाई होती थी। सीतारमण ने कहा कि इसके विपरीत, इस विधेयक से रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।















