लखनऊ में लगातार बिगड़ रहे हैं बाढ़ के हालात

लखनऊ के निचले इलाकों में पानी भरने का मुख्य कारण सितंबर के आखिरी सप्ताह में गोमती नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश है, जिसके चलते नदी अब पानी को बहाकर लखनऊ की ओर ले जा रही है।

लखनऊ में बाढ़ के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। गोमती नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है। मूल भूत सुविधाओं की कमी के अलावा चोरी और बाढ़ के पानी के साथ जहरीले जीव-जंतु भी घरों में पहुँच रहे हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित इलाक़ों में फैजुल्लागंज आता है। इस क्षेत्र में पानी भरने से करीब चालीस हजार घर प्रभावित हुए हैं। इन घरों में 5-6 फीट तक पानी भरा हुआ है। इस बाढ़ के चलते तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक़, पिछले कुछ दिनों से लखनऊ में कोई खास बारिश नहीं हुई है। फिर भी अक्टूबर महीने में राजधानी का बड़ा हिस्सा बढ़ की चपेट में है। शहर के उत्तरी छोर पर स्थित फैजुल्लागंज सबसे ज्यादा प्रभावित है और यहाँ स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रधान सचिव (सिंचाई) अनिल गर्ग ने इस वर्षा को अत्यधिक वर्षा बताते हुए कहा कि गोमती नदी के जलग्रहण क्षेत्र पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खेरी और सीतापुर जिलों में फैले हुए हैं, जहां 22 से 27 सितंबर के बीच असाधारण रूप से भारी वर्षा हुई। सामान्यतः पांच दिनों में लगभग 15 मिमी वर्षा होती है। इस बार लगभग 150 मिमी वर्षा हुई, कुछ स्थानों पर तो लगभग 257 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई।”

गर्ग ने आगे कहा, “स्थानीय बारिश और ऊपर से आने वाले पानी के मिले-जुले असर से नदी का डिस्चार्ज (पानी का बहाव) लगभग 1,100 क्यूसेक तक पहुँच गया।”
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त पानी को आगे बढ़ने देने के लिए गोमती बैराज के सभी 10 गेट खोल दिए गए, क्योंकि पानी को रोकने से और समस्याएँ हो सकती थीं।

साथ ही, जब नदी लखनऊ से होकर गुजरती है, तो इसके बहाव पर नदी के किनारे बने कई पुलों और ढाँचों का असर पड़ता है; इसका मतलब है कि पानी शहर से एक समान बहाव के साथ नहीं गुजरता है।

फैजुल्लागंज सबसे ज़्यादा प्रभावित क्यों है?
फैजुल्लागंज गोमती नदी के बाढ़ वाले इलाके (फ्लडप्लेन) में स्थित है, जो एक ऐसा इलाका है जहाँ नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्वाभाविक रूप से बाढ़ आने का खतरा रहता है।

गोमती नदी पीलीभीत के माधोतंडा के पास से निकलती है और लखनऊ पहुंचने से पहले ऊपरी जिलों से होकर बहती है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में हुई “अत्यधिक वर्षा” के कारण गोमती नदी में गिरने वाली छोटी नदियाँ और धाराएँ भी उफान पर आ गईं, जिसके परिणामस्वरूप गोमती जल प्रणाली में बड़ी मात्रा में पानी प्रवेश कर गया।

गर्ग ने बताया कि नदी प्रणाली में पानी एक पल में नहीं बहता। उन्होंने आगे कहा कि सामान्य परिस्थितियों में पीलीभीत क्षेत्र से लखनऊ तक पानी को पहुंचने में लगभग 10-12 दिन लगते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हालात बहुत ज्यादा बुरे है। राहत सामग्री जिन्हें मिलनी चाहिए, उनको नहीं मिल रहीं और अन्य लोग यह सामान लेकर जा रहे हैं। इन लोगों ने
घरों में चोरियाँ बहुत बढ़ने के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की भी बात कही है।

कुछ स्थानीय लोगों ने आने-जाने के लिए ट्रैक्टर किराये पर लिया हुआ है, यह लोग अपने पोर्च से सीढ़ी लगाकर ट्रैक्टर में उतर रहे हैं। बख्शी का तालाब और लखनऊ उत्तर से लेकर फैजुल्लागंज होते हुए नैमिश की ओर जाने वाले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति के कारण भी बड़ी आबादी को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच खबर है कि इटौंजा में बाढ़ के तेज बहाव में 6 दोस्त बह गए। इनमें से एक की मौत हो गई, जबकि 5 को बचा लिया गया। खाटू श्याम मंदिर, हनुमंत धाम और चंद्रिका देवी मंदिर भी पानी में डूब गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि लेटे हनुमान मंदिर के गर्भगृह में 13 फीट तक पानी भर गया है। करीब 20 साल बाद गर्भगृह बंद करना पड़ा है। चंद्रिका देवी मंदिर भी पानी कम होने तक बंद कर दिया गया है।

इस बीच जिन लोगों के पास पलायन का विकल्प था वे घरों में ताला लगाकर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं। इनमे बहुत से ऐसे हैं जिनके पास कोई विकल्प नहीं मगर फिर भी पलायन को मजबूर हैं। हालात से जूझ रहे बाढ़ प्रभावित लोग सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर प्रशासन से मदद की मांग कर रहे हैं।

खबर में कहा गया है कि अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ विकास प्राधिकरण पहले से ही फैजुल्लागंज में तटबंध बनाने की प्रक्रिया में था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने नदी के किनारे तटबंध बनाने का आदेश दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *