विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में, आशंका जताई है कि इस साल की सर्दी कड़ाके की और लंबी होगी। देश में सर्दी का मौसम इस बार सामान्य से ज्यादा ठंडा रहने वाला है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जो ला नीना की स्थिति के विकसित होने का संकेत देती है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, ला नीना (La Nina) की स्थिति विकसित हो रही है, जिससे पूरे देश में तापमान में गिरावट देखी जाएगी। यह जलवायु स्थिति वैश्विक स्तर पर मौसम के पैटर्न को प्रभावित करती है और भारत में ठंड व वर्षा बढ़ने का कारण बनती है।जानकारों का कहना है कि उत्तर भारत में दिवाली से पहले ही कोहरा और ठंडक महसूस की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कई दशकों के बाद सर्दी बहुत कड़ाके की गुजरने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम के कारण, बारिश से खरीफ फसलों की कटाई में बाधा आ सकती है। ऊपरी इलाकों में ग्लेशियर झीलों के फटने का खतरा बढ़ सकता है और नदियों में पानी की कमी से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य से अधिक ठंड ला नीना के कारण होने की संभावना है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य रूप से कमी आने पर बनता है, और यह ला नीना दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करता है।
गौरतलब है कि ला नीना, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) का ठंडा चरण है। इस दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। नतीजे में वैश्विक वायुमंडलीय प्रवाह में बदलाव आता है। इससे तापमान, वर्षा और तूफान प्रभावित होते हैं।
ENSO यानी अल नीनो-दक्षिणी दोलन चक्र के तीन चरण होते हैं- अल नीनो (गर्म), ला नीना (ठंडा) और उदासीन। ये चरण आमतौर पर हर दो से सात साल में बदलते रहते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ महीनों में ला नीना की स्थिति बनने की उम्मीद है। मानसून के बाद के मौसम के लिए विस्तृत तापमान पूर्वानुमान जल्द जारी किया जाएगा।
याद दिला दें कि इससे पहले मौसम विभाग ने अक्टूबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना जताई थी। पहाड़ी इलाकों में इसका असर ज्यादा दिखेगा, जहां बर्फबारी और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में गिरावट होगी।













