संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एक बार फिर जलवायु संकट से निपटने के लिए ठोस क़दम उठाने की की बात कही है। उन्होंने यह चेतावनी हिमालय क्षेत्र में दरक रहे ग्लेशियर की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए दी।

यूएन सचिव का कहना है कि तापमान के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का अर्थ है, रिकॉर्ड स्तर पर हिमनदों का पिघलना। उन्होंने कहा है कि नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा के लिए यह कार्रवाई विशेष रूप से ज़रूरी है।
महासचिव ने नेपाल सरकार द्वारा राजधानी काठमांडू में आयोजित ‘सागरमाथा सम्वाद’ (Everest Dialogue) को सम्बोधित करते हुए अपने वीडियो सन्देश में इस चुनौती के प्रति आगाह किया।
यूएन प्रमुख के अनुसार, नेपाल में जमे हुए पाने की चादर पतली हो चुकी है। पिछले 30 वर्षों में एक-तिहाई से अधिक जमा हुआ पानी ख़त्म हुआ है। पिछले एक दशक में ग्लेशियर, उससे पहले के दशक की तुलना में 65 प्रतिशत तेज़ रफ़्तार से पिघले हैं।
माउंट ऐवरेस्ट को नेपाली भाषा में सागरमाथा के नाम से जाना जाता है। इस अन्तरराष्ट्रीय प्लैटफ़ॉर्म में मंत्री, सांसद, जलवायु विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि, जलवायु परिवर्तन, पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र और सततता पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।
ग्लेशियर हिमालय क्षेत्र में कई सदियों से ताज़ा जल का अहम स्रोत रहे हैं। मगर उनके पिघलने की रफ़्तार में आई तेज़ी से स्थानीय समुदायों और हिमालय में स्थित जल स्रोतों पर निर्भर आबादियों के लिए ख़तरा है।
गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिन्धु समेत अन्य नदियों में प्रवाह घटने से न केवल जल आपूर्ति बल्कि दक्षिण एशिया में क़रीब दो अरब लोगों के लिए खाद्य उत्पादन पर जोखिम मंडराएगा, और यह सामूहिक विस्थापन की वजह बन सकता है। महासचिव ने कहा कि निचले स्तर पर बसे देश व समुदाय हमेशा के लिए ओझल हो सकते हैं।
यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि जीवाश्म ईंधन की वजह से वैश्विक तापमान में होने वाली वृद्धि के उन्माद को रोकना होगा। इससे पहले, उन्होंने 2023 में अपनी ऐवरेस्ट यात्रा के दौरान भी इस चुनौती के प्रति आगाह किया था।
महासचिव के अनुसार, दुनिया को बिना देरी किए वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना होगा, जोकि पेरिस जलवायु समझौते का एक अहम लक्ष्य है।
इस क्रम में, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को बढ़ाना होगा, कॉप29 जलवायु सम्मेलन में हुए 1,300 अरब डॉलर के जलवायु वित्त पोषण के वादे को पूरा करना होगा, और विकसित देशों द्वारा जलवायु अनुकूलन प्रयासों के लिए कम से कम 40 अरब डॉलर की धनराशि को मुहैया कराना होगा।
महासचिव के अनुसार, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निडर सहयोग की आवश्यकता होगी, और इस दायित्व को निभाने में संयुक्त राष्ट्र सदैव तत्पर है।
उन्होंने वनों को फिर से खड़ा करने, समय पूर्व चेतावनी को इस्तेमाल में लाने और 2045 तक नैट-शून्य उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य के लिए नेपाल के नेतृत्व की सराहना की।














