चांद पर इंसानों के रहने के लिए उपयुक्त गुफा की खोज

वैज्ञानिकों ने पहली बार चंद्रमा पर एक गुफा की खोज की है।बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह के नीचे एक सुलभ गुफा के साक्ष्य मिले हैं, जो चंद्रमा की सतह से लगभग 100 मीटर की गहराई पर स्थित है, जो इंसानों के रहने योग्य हो सकती है।

चांद पर इंसानों के रहने के लिए उपयुक्त गुफा की खोज

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह सैकड़ों अज्ञात, छिपी हुई भूमिगत गुफाओं में से एक है जो जमीन से खुली आँखों से दिखाई देती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर देश चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की होड़ में हैं, लेकिन पहले उन्हें अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण, अत्यधिक तापमान और अंतरिक्ष के मौसम से बचाना होगा।


नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, गुफा अपोलो 11 लैंडिंग स्थल से 400 किमी दूर स्थित है, ये वही स्थान है जहां 55 साल पहले नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन उतरे थे।


अंतरिक्ष में यात्रा करने वाली पहली ब्रिटिश अंतरिक्ष यात्री हेलेन शर्मन ने बीबीसी न्यूज़ को बताया कि नई खोजी गई गुफाएँ रहने के लिए एक मुनासिब जगह मालूम होती हैं।

उन्होंने कहा कि चंद्रमा की गुफाओं में इंसान संभावित रूप से 20-30 साल तक रह सकते हैं, लेकिन ये गुफाएं इतनी गहरी हैं कि अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर निकलने के लिए ‘जेट पैक या एलिवेटर’ का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, गुफा अपोलो 11 लैंडिंग स्थल से 250 मील (400 किमी) दूर स्थित है, बताया गया है कि ये वही स्थान है जहां 55 साल पहले नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन उतरे थे।

चांद पर इंसानों के रहने के लिए उपयुक्त गुफा की खोज

इस गुफा की खोज लोरेंजो ब्रुज़ोन और लियोनार्डो कैरर ने इटली के ट्रेंटो विश्वविद्यालय में रडार का उपयोग करके की थी, जब वे मारे ट्रैंक्विलिटैटिस ( Mare Tranquillitatis) नामक चट्टानी मैदान में गड्ढे में घुसने की कोशिश कर रहे थे।

शोधकर्ताओं ने नासा के लूनर परिक्षण (Lunar Reconnaissance Orbiter) ऑर्बिटर द्वारा लिए गए रडार मापों का विश्लेषण किया और परिणामों की तुलना पृथ्वी पर ज्वालामुखीय क्रेटर से की।

चंद्रमा पर एक गुफा की खोज के बाद यह पता चला है कि ये मानव इस स्थान को आधार के रूप में उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह गुफा कितनी गहराई तक जा सकती है, यह अभी तक ज्ञात नहीं है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस शोध से भविष्य में मंगल ग्रह पर गुफाओं की खोज में भी मदद मिल सकती है।

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