भारत का कोहिनूर वापस किए जाने की मांग अब अमरीका से उठी

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोहिनूर हीरे की बात उठाई है। ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि अगर उनकी किंग चार्ल्स से बात होगी, तो वह सिर्फ औपचारिक नहीं होगी। उनके मुताबिक़, प्रिंस चार्ल्स से बात होने पर वह कोहिनूर हीरा वापस करने की बात कहेंगे। ममदानी की यह टिप्पणी तब आई है, जब किंग चार्ल्स और रानी कैमिला चार दिवसीय के दौरे के तहत न्यूयॉर्क में थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय मूल के मंदानी ने संकेत दिया है कि ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III के साथ उनकी कोई संभावित मुलाकात औपचारिकता से कहीं ज्यादा होगी। ममदानी से सवाल किया गया कि अगर उन्हें किंग से बात करने का मौका मिला तो वह क्या कहेंगे। इस पर ममदानी का जवाब था, “अगर मुझे राजा से बात करने का मौका मिला, तो शायद मैं उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए कहूंगा।”

अपने इस स्टेटमेंट के साथ अमरीका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रिटेन के सदियों पुराने औपनिवेशिक इतिहास को चुनौती देने का संकेत दिया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममदानी ने बिला झिझके ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में भारत से ब्रिटेन ले जाए गए बेशकीमती कोहिनूर हीरे पर बात की।

गौरतलब है कि ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय अमरीका की यात्रा पर हैं और ममदानी ने बुधवार को साफ संकेत दिया कि अगर उनकी किंग चार्ल्स से बात होगी, तो वह सिर्फ औपचारिक नहीं होगी।

ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय और उनकी पत्नी क्वीन कैमिला ममदानी के इस बयान के बाद न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर गए। यहाँ उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के कार्यक्रम में शिरकत की।

बताते चलें कि ममदानी की मां मीरा नायर भारत में पैदा हुई थीं और बाद में अमरीका चली गईं थीं। ज़ोहरान मंदानी के पिता महमूद मंदानी युगांडा के हैं। आमतौर पर मेयर और ब्रिटिश राजघराने के बीच बातचीत सख्त नियमों और “नरम कूटनीति” के तहत होती है, लेकिन ममदानी के बयान ने इस चर्चा में इतिहास का मुद्दा जोड़ दिया है.

भारत की कोल्लूर खान से निकलने वाला कोहिनूर हीरा तराशे जाने से पहले करीब 186 कैरेट का था। यह मुगलों और सिखों सहित कई भारतीय राजवंशों के पास रहा। साल 1849 में दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के बाद, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 साल के महाराजा दलीप सिंह से जबरन लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर कराए, जिसके तहत यह हीरा रानी विक्टोरिया को दे दिया गया।

वर्तमान में 105.6 कैरेट का कोहिनूर हीरा क्वीन एलिजाबेथ के ताज में जड़ा हुआ है और लंदन के टॉवर ऑफ लंदन में भरपूर सुरक्षा में रखा हुआ है। कोहिनूर को भारत के लिए वापस न किया जाने वाला सबसे बड़ा खजाना माना जाता है।

इस वार्ता में ममदानी भारतीय अवाम के दिल की बात करते हैं। भारत की एवं के लिए भी यह कोई कानूनी तोहफा नहीं बल्कि लूटा हुआ खजाना है। हालाँकि ब्रिटिश सरकार का कहना है कि यह हीरा कानूनी संधि के जरिए मिला था। वहीँ भारतीय इतिहासकारों का कहना है कि एक बच्चे से दबाव में कराए गए समझौते की कोई नैतिक या कानूनी मान्यता नहीं होती।

गौरतलब है कि लंदन में मौजूद इस हीरे की मौजूदगी भारतीयों के लिए आज भी औपनिवेशिक दौर में हुए धन के शोषण की याद दिलाती है। ममदानी की यह मांग अकेली नहीं है। ग्रीस (एल्गिन मार्बल्स) और अफ्रीका (बेनिन ब्रॉन्ज़) से भी इस तरह की आवाज़ें उठ रही हैं जिसमे पश्चिमी देशों के संग्रहालय और राजघरानों से उनकी ऐतिहासिक वस्तुएं वापस करने की बात कही गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *