विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को अपनी नई रिपोर्ट में एक चिन्ताजनक रुझान साझा किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, ख़तरनाक बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है। जिसके नतीजे में 2023 में बैक्टीरिया की वजह से विश्व भर में होने वाले हर छह में से एक संक्रमण पर एंटीबायोटिक दवाएँ बेअसर साबित हुईं। ऐसे में बीमारियों का ठीक से इलाज कर पाना कठिन होता जा रहा है।

यह विश्लेषण बैक्टीरिया के कारण होने वाले उन संक्रमणों पर आधारित है, जिनकी प्रयोगशालाओं में पुष्टि की गई थी। जब बैक्टीरिया, वायरस व परजीवी जैसे सूक्ष्मजीवों पर रोगाणुरोधी दवाओं का असर होना बन्द हो जाए, तब रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Anti Microbial Resistance) की स्थिति उत्पन्न होती है।
‘Global antibiotic resistance surveillance report 2025’ नामक इस अध्ययन में 8 आम बैक्टीरिया के कारण यूरीन और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, डाइजेशन,सिस्टम, ब्लड सर्कुलेशन समेत अन्य अंगों में होने वाले संक्रमणों, और उनके उपचार के लिए उपयोग में लाई जाने वाली 22 एंटीबायोटिक दवाओं का आकलन किया गया।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी दी है कि एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध, आधुनिक चिकित्सा में प्रगति को पीछे छोड़ रहा है, जिससे विश्व भर में परिवारों के स्वास्थ्य को ख़तरा है।
एंटीबायोटिक्स व अन्य रोगाणुरोधी दवाएँ इस दवा प्रतिरोध के कारण बेअसर हो जाती हैं। ऐसे में संक्रमण का इलाज करना कठिन या असम्भव हो जाता है और रोग के फैलने, गम्भीर बीमारी होने, विकलांगता तथा मृत्यु का ख़तरा बढ़ जाता है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 2018 से 2023 के दौरान जिन बैक्टीरिया और उसके एंटीबायोटिक उपचार उपायों की निगरानी की गई, उनमें 40 प्रतिशत से अधिक मामलों में प्रतिरोध में वृद्धि देखी गई। औसतन यह प्रतिरोध हर वर्ष 5-15 प्रतिशत तक बिगड़ता जा रहा है। सकते हैं कि अनेक हानिकारक बैक्टीरिया अब एंटीबायोटिक के विरुद्ध अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं और यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।
इसके मद्देनज़र, उन्होंने एएमआर निगरानी व्यवस्था को मज़बूती देने, एंटीबायोटिक दवाओं का ज़िम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने और हर व्यक्ति तक सही दवा पहुँचाने का आग्रह किया है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की टीम द्वारा 100 देशों से प्राप्त होने वाले डेटा के आधार पर यह तैयार विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिण-पूर्वी एशिया और पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्रों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के सबसे अधिक मामले नज़र आ रहे हैं, जहाँ हर तीन में से एक संक्रमण में प्रतिरोध दर्ज किया गया।
अफ़्रीकी क्षेत्र में हर पाँच में से एक संक्रमण में प्रतिरोधक क्षमता देखी गई। यह प्रतिरोध उन क्षेत्रों में आम है, जहाँ स्वास्थ्य प्रणालियों में बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों का निदान या उनका उपचार करने की पर्याप्त क्षमता नहीं है.
विश्लेषण दर्शाता है कि E. coli और K. pneumoniae सबसे चिन्ताजनक दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया हैं, जोकि रक्तप्रवाह में होने वाले संक्रमणों में पाए जाते हैं। इनकी वजह से सेप्सिस हो सकता है, शरीर के अंग काम करना बन्द कर सकते हैं और मौत भी हो सकती है।
40 प्रतिशत E. coli और 55 फ़ीसदी K. pneumoniae अब इन संक्रमणों के उपचार के लिए दी जाने वाली दवा के प्रति बेअसर हैं अफ़्रीकी क्षेत्रों में यह प्रतिरोध 70 प्रतिशत मामलों तक बढ़ गया है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के मामले उन देशों में ज़्यादा दिखाई दे रहे हैं, जहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था कमज़ोर है, निगरानी की सीमित क्षमता है, और पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है।
कुछ हद तक निगरानी व्यवस्था में बेहतरी दर्ज की गई है, लेकिन अब भी अनेक ख़ामियाँ हैं। डब्ल्यूएचओ की निगरानी प्रणाली में देशों की भागेदारी 2016 में केवल 25 थी, जोकि अब बढ़कर 104 पर पहुँच गई है, लेकिन बड़ी संख्या में देशों ने 2023 के लिए आँकड़े उपलब्ध नहीं कराए।
ऐसे में महानिदेशक टैड्रॉस ने सचेत किया कि हमारा भविष्य, मौजूदा निगरानी व्यवस्थाओं को मज़बूती देने, निदान व संक्रमणों के उपचार पर निर्भर करता है। इसके साथ ही उन्होंने अगली पीढ़ी की एंटीबायोटिक दवाओं को विकसित किए जाने को भी महत्वपूर्ण बताया।















