‘सिस्टम का गलत फायदा उठाने के लिए एजेंट कई तरीकों का प्रयोग करते हैं।’ यह मानना है इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन का। पिछले दिनों उन्होंने सरकार सुरक्षा पर केंद्रित एक कानून लाने पर काम किए जाने की बात कही।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को और अधिक रेगुलेट किए जाने की जरूरत है। साइबर घटनाओं के कई मामलों का जिक्र करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि एआई एजेंट ‘सैंडबॉक्स’ से बचकर बाहर निकल जाने के साथ अनियंत्रित हो जाते हैं।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पिछले दिनों इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने कहा था कि एआई मॉडल प्रोवाइडर्स द्वारा जांचे जा रहे एजेंट्स ने अपने दिए गए कामों से आगे बढ़कर बिजनेस रिकॉर्ड, पर्सनल डेटा और कॉन्फिडेंशियल मटीरियल को एक्सेस किया। प्रभावित ऑर्गनाइजेशन में से किसी को भी इस एक्सेस का पता नहीं चला।
रिपोर्ट के मुताबिक़, CERT-In ने एक एडवाइजरी में बताया कि ये घटनाएं तब सामने आईं जब एआई प्रोवाइडर्स ने अपने एजेंट्स की एक्टिविटीज को रिव्यू किया और अपनी मर्ज़ी से उनकी रिपोर्ट की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले सप्ताह जानकारी दी थी कि सरकार एआई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की नींव रखने के लिए एक महीने के भीतर एक ‘कंसल्टेशन पेपर’ जारी करेगी। इस परामर्श पत्र में एआई सुरक्षा सहित डीपफेक और ‘इंसान को प्राथमिकता देने वाले’ नज़रिए पर फोकस किया जाएगा। इस में कानूनी सुरक्षा उपायों के अलावा तकनीकी उपाय भी शामिल होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने यह भी बताया कि सरकार जो 23,000 ग्राफ़िक्स प्रोसेसर यूनिट (GPU) खरीद रही है, उनका अगला सेट मार्च, 2027 तक चालू हो जाएगा। उनके अनुसार, इसमें सरकार की तरफ से 13,000 नए GPU खरीदे जाएंगे और UAE के साथ बाइलेटरल एग्रीमेंट के ज़रिए 10,000 GPU उपलब्ध कराए जाएंगे।