ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर और पत्रकार सर मार्क टली का 90 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्हें ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन में ‘भारत की आवाज़’ कहा जाता था।वह 90 साल के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है।

सर विलियम मार्क टुली का जन्म 24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता में हुआ था और उन्होंने 25 जनवरी 2026 को अंतिम सांस ली। एक ब्रिटिश पत्रकार और नई दिल्ली में बीबीसी के ब्यूरो प्रमुख थे, इस पद पर वे 20 वर्षों तक रहे। उन्होंने जुलाई 1994 में इस्तीफा देने से पहले बीबीसी के साथ 30 वर्षों तक काम किया।
22 वर्षों तक बीबीसी, नई दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख के रूप में काम मार्क केवल एक प्रतिष्ठित पत्रकार थे, बल्कि बीबीसी रेडियो 4 के कार्यक्रम ‘समथिंग अंडरस्टुड’ के प्रस्तुतकर्ता भी रहे।
मार्क टुली ने 1975 में इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने के फैसले की आलोचना की तो सरकार ने उन्हें भारत छोड़ने का आदेश दे दिया। जिसके बाद टुली कुछ समय के लिए दोबारा भारत आए। इसी तरह जब 1977 में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो उस समय भी टुली ने अहम रिपोर्टिंग की।
मार्क टली ने भारत से जुड़ी खबरों के मामले में सबसे भरोसेमंद रिपोर्टर और कमेंटेटर के रूप में जगह बनाई है। लेखक के रूप में टुली ने भारत पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जिनमें ‘नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया’, ‘इंडिया इन स्लो मोशन’ और ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’ शामिल हैं।
मार्क ने भारत में कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया है। इनमें अकाल, दंगे, हत्याएं, भोपाल गैस त्रासदी और सिख स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना के हमले जैसी बड़ी घटनाओं पर रिपोर्टिंग की थी।
पत्रकारिता में मार्क टुली को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई बार सम्मानित किया गया। उन्हें 2002 में नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया। साल 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से नवाजा गया।














