इंडिगो संकट अभी पूरी तरह से के हल नहीं हुआ है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रविवार शाम को साझा की जानकारी में बताया कि एयरलाइन ने यात्रियों को 610 करोड़ का रिफंड लौटा दिया है। कंपनी ने देशभर में यात्रियों के 3 हजार से ज्यादा बैगेज भी लौटाए हैं।

शुक्रवार को एयरलाइन ने लगभग 1600 फ्लाइट और शनिवार को तकरीबन 800 फ्लाइट कैंसिल की थीं। रविवार को भी इंडिगो की 650 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हुई हैं। इनमें दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, हैदराबाद, भोपाल, मुंबई, त्रिची से जाने वाली फ्लाइट्स शामिल हैं।
देश की हवाई यात्रा में सबसे बड़ी हिस्सेदारी निभाने वाली एयरलाइन इंडिगो की अव्यवस्था को लेकर एक और पहलू सामने आया है। इंडिगो के एक कर्मचारी का खुला पत्र इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह पत्र इंडिगो की व्यवस्था के खोखलेपन को दर्शाता है। चिट्ठी लिखने वाले ने केंद्र सरकार से सीधी अपील की है कि वह हस्तक्षेप करे और एविएशन सेक्टर के कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू करे।
अपने इस खुले पत्र के माध्यम से कर्मचारी ने बताया है कि कैसे भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो धीरे-धीरे अंदर से खोखली हो गई। यह सब रातों-रात नहीं हुआ बल्कि बर्बादी का खेल कई वर्षों से चल रहा था।
कर्मचारी ने इस पत्र के माध्यम से कंपनी के अंदर कई सालों से चल रही समस्याओं, कर्मचारियों के बढ़ते संकट और मैनेजमेंट की अनदेखी का खुलासा किया है।
इस पत्र के हवाले से एयरलाइन के शीर्ष प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया गया है कि ये संकट अभी का नहीं है। ये संकट बरसों से बन रहा था और कर्मचारियों ने इसके बारे में पहले ही महसूस कर लिया था।
पत्र लिखने वाले इस कर्मचारी ने अपनी बात में कहा है कि 2006 में जब इंडिगो की शुरूवात हुई थी उस समय टीम को अपने काम पर गर्व था। लेकिन धीरे-धीरे यह गर्व घमंड में बदल गया और विकास लालच में तब्दील हो गया।
पत्र लिखने वाले कर्मचारी ने बताया कि 2006 में जब इंडिगो शुरू हुई थी, तब टीम को अपने काम पर गर्व था। लेकिन, धीरे-धीरे यह गर्व अहंकार में बदल गया और विकास लालच में। पत्र में यह भी बताया गया है कि एयरलाइन की बदहाली की जड़ वहीं से शुरू हुई, जब प्रबंधन ने अनुभव और योग्यता की अनदेखी की। योग्यता की जगह ऐसे लोगों को बड़े पद सौंप दिए गए जिनके पास न योग्यता थी और न ही संचालन की समझ।
इस चिट्ठी के माध्यम से कर्मचारी ने इन मांगों को सामने रखा है-
ग्राउंड स्टाफ के लिए न्यूनतम वेतन तय किया जाए।
हर विमान में पर्याप्त स्टाफ तैनात किया जाए।
थकान से जुड़े नियमों की समीक्षा की जाए।
ऑपरेशनल गड़बड़ियों और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो।
इस पत्र में विदेशी अधिकारियों के नाम भी लिए गए हैं। हालाँकि इस पत्र को लेकर अभी तक इंडिगो की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।














