बिहार के बाद अब पूरे देश में होगी वोटर लिस्ट की जांच

निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि पूरे भारत में मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करेगा। एसएआर को लेकर चुनाव आयोग की योजना है कि अब बिहार के बाद पूरे देश में वोटर लिस्ट की समीक्षा होगी। इसके लिए आयोग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं और सभी राज्यों में अपनी चुनाव मशीनरी को सक्रिय कर दिया है।

बिहार के बाद अब पूरे देश में होगी वोटर लिस्ट की जांच

अपने फैसले में निर्वाचन आयोग का कहना है कि बिहार की तरह ही अगले महीने देशभर के सभी राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया जाएगा।

गौरतलब है कि विपक्षी दलों द्वारा निवार्चन आयोग के बिहार मतदाता सूची के पुनरीक्षण के फैसले को लेकर विरोध किया गया था। इस संबंध में विपक्ष का आरोप था कि सरकार पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर रही है। आयोग के इस फैसले को चुनौती देने के लिए विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाईं थी।


आयोग ने जानकारी दी है कि बिहार के साथ अब देश भर के सभी राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जाएगा। आयोग का कहना है कि इस फैसले का से विदेशी अवैध प्रवासियों की पहचान करके उन्हें मतदाता सूची से बाहर किया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट ने निवार्चन आयोग को अपना काम जारी रखने का आदेश देते हुए इस मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 28 जुलाई की दी थी। उम्मीद है कि 28 जुलाई के बाद राष्ट्रव्यापी पुनरीक्षण पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस बीच बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामले पर कोर्ट 28 जुलाई को सुनवाई करेगी। आइल बाद ही अंतिम फैसले पर मोहर लगाई जाएगी।

इस दौरान कई राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने अपने राज्य में पूर्व में किए गए एसएआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची को जारी कराना शुरू कर दिया है। जिसके तहत दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 2008 में हुई अंतिम बार व्यापक पुनरीक्षण की सूची वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है।

बताते चलें कि अधिकांश राज्यों ने 2002 और 2004 के बीच मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया था। वर्तमान में निर्वाचन आयोग बिहार की 2003 की मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कर रहा है। उत्तराखंड द्वारा जो मतदाता सूची अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है, वह विशेष गहन पुनरीक्षण 2006 की है।

बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न राज्यों में अवैध विदेशी प्रवासियों पर कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस जाँच के बाद विदेशी अवैध प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच करके उन्हें सूची से बाहर किया जाएगा, जिससे निष्पक्ष चुनाव हो सकें।

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