राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री कीर्ति सुरेश को भारत स्थित यूनीसेफ़ कार्यालय द्वारा बाल अधिकारों के लिए पैरोकार नियुक्त किया गया है। कीर्ति अब पूरे देश में बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाने में सहयोग करने वाली प्रमुख हस्तियों में शामिल हो गई हैं।

तमिल, तेलुगु और मलयालम सिनेमा में अपनी प्रभावशाली भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध कीर्ति सुरेश का ख़ास ध्यान बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा व लैंगिक समानता पर रहेगा।
बच्चों के अधिकारों से जुड़े अहम मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलन्द करने वाली कीर्ति दक्षिण भारत में बेहद लोकप्रिय हैं। कीर्ति सुरेश अपनी संवेदना और व्यापक पहुँच का उपयोग, उन मुद्दों को सामने लाने के लिए करेंगी, जिन पर तुरन्त ध्यान देने की आवश्यकता है।
कीर्ति सुरेश की यह पहल एक बेहद महत्वपूर्ण समय पर शुरू हो रही है। भारत में क़रीब 5 करोड़ बच्चे और किशोर, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन कलंक की मानसिकता व सेवाओं की कमी के कारण अधिकांश बच्चों व किशोरों को मदद नहीं मिल पाती।
यूनिसेफ ने भारत में इस अवसर पर कहा है कि इस साझेदारी के ज़रिए, बच्चों और किशोरों की ज़रूरतों एवं अधिकारों पर, राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चर्चा को बल मिलेगा। यूनिसेफ-इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा कि कीर्ति का दर्शकों से गहरा जुड़ाव, बच्चों के हित में काम करने के लिए “एक सशक्त और प्रेरक मंच” प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, “वह हमारे उस मिशन में ऊर्जा और प्रभाव लेकर जुड़ी हैं, जिसका उद्देश्य हर बच्चे, ख़ासतौर पर सबसे अधिक वंचित बच्चों तक जरूरी सहायता और सेवाएँ पहुँचाना है।”
कीर्ति सुरेश का कहना है- “बच्चे हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी और हमारी सबसे बड़ी आशा हैं। मेरा हमेशा से यही मानना है कि स्नेह और पोषण से भरी देखभाल वह आधार तैयार करती है, जिससे बच्चे, सामाजिक व भावनात्मक कौशल विकसित कर पाते हैं तथा ख़ुशहाल, स्वस्थ एवं सार्थक जीवन जीते हैं।”
कीर्ति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हर बच्चे को शिक्षा हासिल करने, सपने देखने और अपनी बात सुने जाने की जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने भारत में यूनिसेफ के 76 वर्षों के कार्य को रेखांकित किया, जिसमें संगठन ने सरकार और साझीदारों के साथ मिलकर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, संरक्षण और विकास के अवसरों का लगातार विस्तार किया है।
उन्होंने कहा, “भारत में बच्चों के लिए यूनिसेफ की पैरोकार के रूप में जुड़ना मेरे लिए सचमुच सम्मान की बात है। हर बच्चे को स्वस्थ रूप से बड़ा होने, सीखने, बड़े सपने देखने और बस एक बच्चा बने रहने का अवसर मिलना चाहिए।”










