1993 सीरियल ब्लास्ट से जुड़े अब्दुल करीम टुंडा बरी

1993 के बम धमाकों के आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया गया है। साल 2013 में गिरफ्तार होने वाले अब्दुल करीम टुंडा को निर्दोष बताते हुए राजस्थान के अजमेर की टाडा कोर्ट ने बरी कर दिया है।

1993 सीरियल ब्लास्ट से जुड़े अब्दुल करीम टुंडा बरी

कोर्ट ने आज 29 फरवरी को 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट केस के मुख्य आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को हर धारा और हर एक्ट से बरी कर दिया है।

6 दिसंबर 1993 को देश के कई शहरों में बम विस्फोट मामले में करीम टुंडा, इरफान और हमीदुद्दीन पर आरोप था। टाडा कोर्ट ने 20 साल पहले 28 फरवरी 2004 को मामले में 16 अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने चार आरोपियों को बरी करते हुए बाकी की सजा बरकरार रखी। ये आरोपी जयपुर जेल में बंद थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अब्दुल करीम के वकील शफकत सुल्तानी ने बताया कि अब्दुल करीम टुंडा पूर्णता निर्दोष हैं। आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को टाडा कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी किया गया है। इस मामले पर कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि टुंडा के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं मिला है।

गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की पहली बरसी 6 दिसंबर 1993 को देश के कई शहरों में ट्रेनों में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। ये ब्लास्ट लखनऊ सहित कोटा, सूरत ,कानपुर, सिकंदराबाद, मुंबई और की ट्रेनों में हुए थे। अब्दुल करीम टुंडा पर इन मामलों के तहत दहशत फैलाने का आरोप लगाया गया था।

वकील शफकत सुल्तानी ने मीडिया से बात चीत के दौरान बताया कि कोर्ट के फैसले के मुताबिक़ अब्दुल करीम टुंडा पूरी तरह से निर्दोष हैं। अब्दुल करीम टुंडा को सभी धाराओं और सभी अधिनियमों से बरी कर दिया गया है।

वकील के मुताबिक़ सीबीआई अभियोजन टाडा, आईपीसी, रेलवे अधिनियम, शस्त्र अधिनियम या विस्फोटक पदार्थ अधिनियम कोर्ट में अदालत के सामने कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। आगे उन्होंने कहा कि इरफान और हमीदुद्दीन को दोषी ठहराया गया है और जल्द ही सजा सुनाई जाएगी।

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