वैज्ञानिकों का कहना है कि सूंघने की क्षमता का कम होना डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है

मानसिक क्षमताओं में कमी और याददाश्त के कम होने से जुड़ा एक नया अध्ययन सामने आया है। अध्ययन बताता है कि आपकी सूंघने की क्षमता डिमेंशिया की समस्या का सालों पहले ही पता लगा सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि सूंघने की क्षमता का कम होना डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है

यह नया अध्ययन बताता है कि सूंघने की क्षमता का कम होना डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है। जर्मन वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मस्तिष्क की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली, सूंघने की क्षमता से जुड़े महत्वपूर्ण तंत्रिका तंतुओं पर हमला करती है।

अल्ज़ाइमर इस बीमारी का सबसे आम प्रकार है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह मस्तिष्क में प्रोटीन के जमाव के कारण होता है।हालाँकि भूलने की बीमारी या याददाश्त का कमज़ोर होना इसका सबसे आम लक्षण है, लेकिन यह आपकी सूंघने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

म्यूनिख विश्वविद्यालय के डॉक्टर जोचेन हर्म्स ने कहा कि हमारी खोज उन मरीज़ों के लिए बेहतर हो सकती है जिन्हें अल्जाइमर रोग होने का खतरा है। इसके लिए, उन्हें एक व्यापक परीक्षण से गुज़रना होगा ताकि उनमें मानसिक समस्याएँ दिखने से पहले ही इसका निदान किया जा सके।

शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि ये समस्या इसलिए सामने आती है क्योंकि मस्तिष्क की “माइक्रोग्लिया” नामक प्रतिरक्षा कोशिकाएँ मस्तिष्क के दो क्षेत्रों, अर्थात् घ्राण बल्ब (olfactory bulb) और लोकस कोएर्यूलस (locus coeruleus) के बीच के संबंध तोड़ देती हैं। दिमाग़ के अगले भाग में स्थित घ्राण बल्ब, नाक के गंध ग्राही से मिलने वाली संवेदी जानकारी का विश्लेषण करता है। मस्तिष्क स्तंभ का एक क्षेत्र, लोकस कोएर्यूलस, लोकस कोएर्यूलस में स्थित न्यूरॉन्स से निकलने वाले और बल्ब तक फैले लंबे तंत्रिका तंतुओं के माध्यम से इस प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

गौरतलब है कि ब्रिटेन में वर्तमान में 95 लाख लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और इस दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर दस लाख से ज़्यादा हो जाएगी।

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