एक जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर अलगेमाइन जितुंग (FAZ) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी अमरीकी कृषि व्यवसाय के लिए भारत के बाजार खोलने के ट्रंप के दबाव का विरोध कर रहे हैं।

भारत पर अमरीका के 50 फीसदी टैरिफ लगाने के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इसे कार्रवाई माना जा रहा है। इसी क्रम में अगली खबर यह है अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चार बार किए गए फोन को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिसीव नहीं किया है।
बताते चलें कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। टैरिफ की डेडलाइन 27 अगस्त बुधवार को खत्म हो गई है। अब भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लग गया है। एक्सपर्ट का कहना है कि नए टैरिफ सिस्टम से भारत को कुछ सेक्टर में नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत के साथ-साथ ब्राजील पर भी सबसे ज्यादा टैरिफ लगा है।
जानकारों का कहना है कि टैरिफ से भारत का टेक्सटाइल सेक्टर प्रभावित हो सकता है। देश की ओर से अमरीका को 10.9 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात किया जाता है। इसमें पूरा टेक्सटाइल सेक्टर शामिल है। इसके अलावा डायमंड और ज्वेलरी का 10 अरब डॉलर वाले सेक्टर पर भी टैरिफ का प्रभाव पड़ सकता है। मशीनरी, उपकरण, कृषि, प्रोसेस्ड फूड, धातु, कार्बन रसायन और हैंडीक्राफ्ट उद्योग भी प्रभावित हो सकता है।
याद दिला दें कि प्रधानमंत्री मोदी पहले भी किसानों के लिए बात करते हुए कह चुके हैं कि भारत किसानों के हितों की खातिर किसी के आगे नहीं झुकेगा, चाहे इसके लिए दोस्ती की कुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े।
बीते दिन यानी बुधवार से ट्रंप ने मोदी को टेरेफिक बताकर भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। इस दौरान भारत की यात्रा पर आये फिजी के प्रधानमंत्री ने भी मोदी से कहा है कि कोई आपसे खुश नहीं है, मगर आप असहज हालात झेल सकते हैं।
सोमवार को जारी अमरीकी गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया था- ”बढ़ा हुआ टैरिफ उन भारतीय उत्पादों पर लागू होगा, जिन्हें 27 अगस्त, 2025 को ‘ईस्टर्न डेलाइट टाइम’ (EDT) के मुताबिक रात 12.01 बजे या उसके बाद उपभोग के लिए (देश में) लाया गया है या गोदाम से निकाला गया है। बशर्ते कि उन्हें देश में उपयोग के लिए मंजूरी दे दी गई हो।”
फिजी के प्रधानमंत्री राबुका ने दिल्ली में सप्रू हाउस में भारतीय वैश्विक परिषद द्वारा आयोजित ‘शांति का महासागर’ विषय पर व्याख्यान देने के बाद श्रोताओं के साथ बातचीत के समय प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी बातचीत का ब्यौरा साझा किया।
बताते चलें कि जर्मन अखबार में भारत की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीद जारी रखने की बात भी कही गई है। अखबार के मुताबिक़, भारत अमरीका के आगे नहीं झुका। ट्रंप दावा करते रहे हैं कि भारत के तेल खरीदने से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को वित्तपोषित कर रहा है। इसे भारत के पैसों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जंग में रूस का सहयोग बताया गया है। वहीँ यह हकीकत भी ज़ाहिर की गई है कि भारत के अलावा यूरोपीय यूनियन के कई देश और खुद अमरीका भी रूस से कई वस्तुएं खरीदता रहा है।
