पूरी दुनिया 16 जुलाई को विश्व सर्प दिवस मनाती है। इस दिन को मनाने के साथ ही वाइल्डलाइफ एसओएस हर मानसून के मौसम में एक गंभीर समस्या की तरफ लोगों का ध्यान भी आकर्षित करती है।सर्प दिवस सांपों के संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने और गलत धारणाओं को दूर करने का एक सबसे अच्छा दिन है।

इस दिवस का उद्देश्य सांपों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना, उनकी विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षण देना है, साथ ही सांपों से जुड़े तमाम नकारात्मक मिथकों एवं भ्रांतियों को भी दूर करना है।
विश्व सर्प दिवस 2025 की इस बार की थीम साँपों के संरक्षण, उनके बारे में मिथकों को दूर करने और उनके साथ सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस बार की थीम कहती है-“सम्मान करें, डरें नहीं: प्रकृति के मूक संरक्षकों की रक्षा करें”।
सांप पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसके अलावा ये मनुष्यों को आर्थिक और चिकित्सीय लाभ प्रदान करते हैं। सांप कई दवाओं का स्रोत होते हैं। सांप के काटने पर उपचार के लिए प्रयोग होने वाला सांप-विरोधी विष भी सांप के जहर से हासिल होता है। सांप कुतरने वाले जानवरों को अपने आहार के रूप में खाकर उनकी आबादी को काबू में रखने में मदद करते हैं, जिससे जूनोटिक रोग संचरण को रोका जा सकता है, तथा खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया जा सकता है।
सांप प्रकृति के अनुरूप अपना रंग भी माहिर होते हैं। एक और ख़ास बात यह है कि सांप अपने सिर से 75 से 100 फीसदी बड़े जानवरों को निगलने में सक्षम होते हैं। नवीनतम गणना से पता चलता है कि दुनिया में सांपों की 3,789 प्रजातियां हैं, जो उन्हें छिपकलियों के बाद सरीसृपों का दूसरा सबसे बड़ा समूह बनाती हैं। वे 30 अलग-अलग परिवारों और कई उप-परिवारों में विभाजित हैं। इनमे से सबसे अधिक क रीब 140ऑस्ट्रेलिया में हैं।
भारत में सांप की लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारतीय संस्कृति में, कोबरा को नागों का राजा माना गया है। भारतवासियों के लिए विश्व सर्प दिवस का विशेष महत्व है।भारत में प्राचीनकाल से ही सांपों की पूजा होती रही है। इससे जुड़ा नागपंचमी का पर्व इसी माह 29 जुलाई को मनाया जाएगा।














