विश्व पर्यावरण दिवस-आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य का प्रयास

हर साल 5 जून का दिन दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण के बारे में जानकारी फैलाकर इससे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस-आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य का प्रयास

विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में हुई और 5 जून 1972 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसकी स्थापना की गई। सबसे पहले यह दिन स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में मनाया गया, जिसमें लगभग 119 देशों ने भाग लिया।


  • विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम है- ‘भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा सहनशीलता’।
  • पहला विश्व पर्यावरण दिवस 1973 में “केवल एक पृथ्वी” थीम के साथ मनाया गया था।
  • पिछले वर्ष इस दिन को ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ थीम के साथ मनाया गया था।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के प्रस्ताव को पारित किए जाने के बाद से हर साल यह दिन मनाया जाने लगा। पहला विश्व पर्यावरण दिवस 1973 में “केवल एक पृथ्वी” थीम के साथ मनाया गया था।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम है- ‘भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा सहनशीलता’। साल 2023 में इस दिन को ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ थीम के साथ मनाया गया था।

विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया को संयुक्त राष्ट्र के उन लक्ष्यों की याद दिलाता है जहाँ पर्यावरण और विकास में संतुलन हो। इसमें जलवायु परिवर्तन का मुकाबला, स्वच्छ जल और स्वच्छता सुनिश्चित करना, गरीबी उन्मूलन, टिकाऊ उत्पादन और खपत को बढ़ावा देना आदि शामिल हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक दिन पर्यावरण के प्रति सचेत रहने और उसे बचाने के साथ एक ज़िम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है। जिसके तहत एक इंसान को छोटे-छोटे प्रयास इस काम में बड़ा योगदान दे सकते हैं। जैसे पानी की बर्बादी को रोकना, बिजली का कम इस्तेमाल करना, कचरे को कम करना और उसका रिसायकिल करना, पौधे लगाना, वाहनों का कम इस्तेमाल करना आदि,

आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण बचाना सामूहिक दायित्व है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया में हर पर्यावरण के बेहतर स्तर को प्राप्त करना और लोगों को प्रकृति के करीब लाते हुए इसके महत्व को समझना है।

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