एआई जेनरेटिड म्यूजिक ने संगीत के कारोबारियों की बढ़ाई चिंता

अब जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जीवन के हर क्षेत्र में घुसपैठ कर चूका है वहीँ इससे पनपने वाले विवाद भी हर दिन सुर्खयां बटोर रहे हैं। ऐसे में एक नया विवाद इस समय लोगों का ध्यान खींच रहा है।

एआई जेनरेटिड म्यूजिक ने संगीत के कारोबारियों की बढ़ाई चिंता

संगीत की दुनिया में एआई का करिश्मा आम बात है। आज विश्व का पहला एआई जेनरेटेड म्यूजिक एल्बम भी आ चुका है। वॉश्ड आउट के लेटेस्ट एल्बम, “द हार्डेस्ट पार्ट” का चार मिनट का म्यूजिक वीडियो पूरी तरह से ओपनएआई के टेक्स्ट-टू-वीडियो मॉडल, सोरा के साथ तैयार किया गया था।


तमाम सवालों के बीच अब एआई टेक्नीक के माध्यम से वोकल प्रोफाइल के अनचाहे यूज के कारण म्यूजिक इंडस्ट्री में कमाई के खतरे के बारे में भी चिंता बढ़ी है।


ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से बनाया गया अब तक का सबसे लंबा वीडियो है। द हार्डेस्ट पार्ट का म्यूजिक वीडियो, एक मेन म्यूजिक आर्टिस्ट, फिल्ममेकर और ओपनएआई के सोरा टेक्स्ट-टू-वीडियो जनरेटर के बीच पहला सहयोग है।

एआई म्यूजिक जेनेरेट के बाद इस गीत संगीत के रचनाकार के मालिक को लेकर मामला फँस गया है। इन पर कॉपीराइट का कानून किस तरह से लगाया जायेगा और इनकी मौलिकता पर कैसे तय की जाएगी ? इन तमाम सवालों ने एक नई बहस छेड़ दी है।

कलाकारों को चिंता है कि म्यूजिक की रॉयल्टी, क्रिएटिव राइट्स, कॉपीराइट के साथ कारोबार पर असर तो पड़ेगा ही साथ ही ओरिजनल कलाकारों की जगह ऐप बेस्ड एआई जेनरेटिड म्यूजिक का चलन बढ़ जाएगा। कलाकारों की नक़ल आम बात हो जाएगी।

पिछले वर्ष इस मांग पर हॉलीवुड के लेखकों ने हड़ताल भी की थी और सवाल किया था कि उनके पेशे में जेनेरिक एआई का यूज कैसे किया जा सकता है।

फिलहाल तमाम सवालों के बीच अब एआई टेक्नीक के माध्यम से वोकल प्रोफाइल के अनचाहे यूज के कारण म्यूजिक इंडस्ट्री में कमाई के खतरे के बारे में भी चिंता बढ़ी है।

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