बिहार के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत

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पटना। पटना हाई कोर्ट ने बुधवार को बहुचर्चित तेजाब कांड में दो सगे भाइयों की हत्या के चश्मदीद गवाह राजीव रोशन हत्याकांड में नामजद सिवान के पूर्व सांसद मो.शहाबुद्दीन को जमानत दे दी, जिससे उनके जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया। न्यायाधीश जितेन्द्र मोहन शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूर्व सांसद मो.शहाबुद्दीन को जमानत दे दी। इससे पूर्व बचाव पक्ष के वकील वाई वी गिरि ने कहा कि दो सगे भाइयों की हत्या के चश्मदीद गवाह राजेश रोशन की हत्या 16 जून 2014 को हुई थी। shahbuddin

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उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड में उनके मुवक्किल पर कोई सीधा आरोप नहीं है। उनपर हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप है। निचली अदालत में इस मामले में चल रही सुनवाई में भी कोई प्रगति नहीं है। ऐसे में सिर्फ हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप में उन्हें जेल में लंबे समय तक रखा जाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन को अन्य सभी मामलों में जमानत मिली हुई। इस मामले में जमानत मिलने पर पूर्व सांसद जेल से रिहा हो जाएंगे।

वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया, लेकिन न्यायाधीश शर्मा ने गिरि की दलील को स्वीकार करते हुए शहाबुद्दीन को जमानत दे दी। गौरतलब है कि सिवान के व्यवसायी चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदाबाबू के गौशाला रोड में निमार्णाधीन मकान के विवाद के निपटारे को लेकर हुई पंचायत के दौरान गृहस्वामी के परिजनों ने आत्मरक्षा में घर में रखे तेजाब का प्रयोग किया था। इस दौरान तेजाब फेंकने से कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इस घटना की प्रतिक्रिया में उसी दिन व्यवसायी के दो पुत्रों गिरीश (24) एवं सतीश (18) का अपहरण हो गया। बाद में दोनों की तेजाब से नहलाकर हत्या कर दी गई थी।

अपहृतों की मां कलावती देवी के बयान पर दो नामजदों नागेंद्र तिवारी और मदन शर्मा के साथ चार-पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मो.शहाबुद्दीन का नाम इस प्राथमिकी में कई साल बाद तब जुड़ा जब छह जून 2011 को अचानक गिरीश और सतीश के बड़े भाई राजीव रोशन ने कोर्ट में खुद को चश्मदीद गवाह बताया और विशेष अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। उसने खुलासा किया कि अपहरण दो भाइयों का ही नहीं, उसका (राजीव रोशन) भी किया गया था। उसके दोनों भाइयों की हत्या उसकी आंखों के सामने पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के पैतृक गांव प्रतापपुर में तेजाब से नहलाकर की गई थी।

हालांकि, उस समय मो. शहाबुद्दीन सिवान जेल में बंद थे, लेकिन राजीव रोशन का दावा था कि वह (शहाबुद्दीन) उस वक्त वहां मौजूद थे। चश्मदीद के इस बयान को तत्कालीन विशेष सत्र न्यायाधीश एस.के. पाण्डेय की अदालत ने विलंब से दिया बयान बताकर मो. शहाबुद्दीन के खिलाफ मामला चलाने से इनकार कर दिया। बाद में पटना हाई कोर्ट के आदेश पर विशेष अदालत में एक मई 2014 को भारतीय दंड सहिंता की धारा 302 एवं 120 बी व 201 के तहत पूर्व सांसद मो.शहाबुद्दीन के विरुद्ध हत्या और षड्यंत्र के नए आरोप तय किए गए। मामला फिर से सुना जाना था, इसी बीच 16 जून 2014 को राजीव रोशन की हत्या हो गई। इस मामले में शहाबुद्दीन के साथ उनके बेटे ओसामा भी आरोपी हैं। बाद में सिवान की विशेष अदालत ने तेजाब कांड में मो.शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। shahbuddin

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