अनुच्छेद-370 मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता या उत्तरदाता की ओर से पेश कोई वकील लिखित दलील दाखिल करना चाहता है, तो वह अगले तीन दिनों में ऐसा कर सकता है।

अनुच्छेद-370 मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने जम्मू-कश्मीर मामले में फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जम्मू-कश्मीर मामले में अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने तथा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को 2019 में एक संविधान पीठ को भेजा गया था।

शीर्ष अदालत में पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 16 दिनों तक दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। पीठ में शामिल देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल थे।

सुनवाई के अंतिम दिन कोर्ट ने वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनी। इस दौरान कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन, जफर शाह, दुष्यन्त दवे और अन्य ने अपनी दलीलें पेश कीं।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता अथवा उत्तरदाता को अगले तीन दिनों में लिखित दलील दाखिल करने की इजाज़त दी है। कोर्ट ने ये भी कहा है कि लिखित दलील दो पेज से अधिक की नहीं होनी चाहिए।

पिछले 16 दिन की सुनवाई के दौरान अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बचाव पर भी पक्ष प्रस्तुत किये गए। केंद्र और हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अदालत में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ताओं में हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी गिरि और अन्य ने अपनी बात कही।

वकीलों ने प्रावधान को निरस्त करने संबंधी जिन मुद्दों पर विचार रखे गए उनमे-

  • केंद्र के 5 अगस्त 2019 के फैसले की संवैधानिक वैधता,
  • पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने वाले जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम की वैधता,
  • 20 जून 2018 को जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन का लगाया जाना,
  • 19 दिसंबर 2018 को राष्ट्रपति शासन लगाए जाने और 3 जुलाई 2019 को इसे विस्तारित किया जाना जैसे विभिन्न मुद्दे शामिल थे।

गौरतलब है कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के चलते पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था।

बताते चलें कि अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने और जम्मू तथा कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को 2019 में एक संविधान पीठ को भेजा गया था।

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