… और जब चांद हो गया सुर्ख लाल

मौजूदा सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण भारत समेत दुनिया के कई देशों में देखा गया. रात 11.54 मिनट पर चंद्र ग्रहण शुरू होने के बाद ये पहले काले और फिर धीरे-धीरे लाल रंग में तब्दील होता गया. चांद के इस रूप को ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है.

लोगों ने कई घंटों बड़े उत्साह के साथ चंद्र ग्रहण का इंतज़ार ​किया. भारत में चंद्र ग्रहण के दौरान कई लोगों ने गंगा स्नान भी किया.

नासा के मुताबिक ये 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण था. इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट बताई गई.

सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है. यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे के बिल्कुल सीध में हों.

पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इससे चंद्रमा के छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है. और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है. इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.

ये चंद्र ग्रहण उत्तरी अमरीका को छोड़ कर पृथ्वी के अधिकांश भाग में दिखा लेकिन पूर्ण चंद्र ग्रहण यूरोप के अधिकांश भागों, मध्यपूर्व, मध्य एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा गया.

भारत में इस दुर्लभ आकाशीय घटना को दिल्ली, पुणे, बेंगलुरू और मुंबई समेत देश के सभी शहरों में देखा गया. कई चैनलों और वेबसाइट पर चंद्र ग्रहण की सीधी तस्वीरें दिखाई गईं.

चंद्र ग्रहण के दौरान चांद पृथ्वी से अपनी सर्वाधिक दूरी पर रहा. इस घटना को अपोगी कहते हैं जिसमें पृथ्वी से चांद की अधिकतम दूरी 4,06,700 किलोमीटर होती है.

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