मंगल जैसे माहौल में 378 दिन बिताने के बाद लौटे नासा के चार वॉलंटियर

यूएस स्पेस एजेंसी नासा के चार वॉलंटियर मंगल जैसे माहौल में 378 दिन बिताने के बाद आखिरकार नॉर्मल ज़िंदगी में लौट आए हैं। इससे पहले भी नासा इस तरह का एक साल का प्रयोग कर चुका है। इन अनुभवों के आधार पर नासा अपने दस्ते को मंगल गृह पर भेजने की तयारी कर रहा है।

इस मिशन में चार लोगों को मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में पूरे 378 दिनों तक रखा गया। इन चार लोगों को दुनिया से 378 दिन तक बेखबर रखने वाले वाला यह मिशन एक अनुभव था। इस अनुभव की बदौलत अब भविष्य में मंगल मिशन की सफलता तय करने की योजना बनाई जा रही है।

इसके लिए नासा ने एक अनोखा प्रयोग किया। चार लोगों वाली इस टीम को यूएस के ह्यूस्टन में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में एक खास लिविंग क्वार्टर में रखा गया।
इस टीम में शामिल मेंबर थे-
रॉस एल्डर – कमांडर
एलेन एलिस – मेडिकल ऑफिसर
मैथ्यू मोंटगोमरी – साइंस ऑफिसर
और जेम्स स्पाइसर – फ्लाइट इंजीनियर

इस प्रयोग का मकसद यह टेस्ट करना था कि मंगल की लंबी यात्रा के दौरान इंसान अकेलेपन, कम रिसोर्स और साइकोलॉजिकल स्ट्रेस का सामना कैसे कर सकते हैं।

ऐसे ही सवालों की तलाश के लिए, वॉलंटियर एक साल से ज़्यादा समय तक 1,700 स्क्वेयर फुट के 3D-प्रिंटेड लिविंग एरिया में रहे, जहाँ उन्होंने फसलें उगाईं, स्पेसवॉक की प्रैक्टिस की और साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट किए।

एक्सपेरिमेंट के दौरान, बाहरी दुनिया से कम्युनिकेशन के लिए एक आर्टिफिशियल डिले सिस्टम भी शुरू किया गया था ताकि पृथ्वी और मंगल के बीच मैसेज भेजने में लगने वाले समय को सिमुलेट किया जा सके। यहाँ परिवार के साथ भी कम्युनिकेशन सिर्फ़ देरी वाले ईमेल तक ही सीमित था।

क्रू हेल्थ एंड परफॉर्मेंस एक्सप्लोरेशन एनालॉग (CHAPEA) नाम का यह एक्सपेरिमेंट 19 अक्टूबर, 2025 को शुरू हुआ, जिसके दौरान NASA ने वॉलंटियर्स की रोज़ाना की एक्टिविटीज़, फिजिकल हेल्थ, टीमवर्क और कम रिसोर्स के इस्तेमाल का असेसमेंट किया।

अब, चार वॉलंटियर्स के मेडिकल एग्जामिनेशन और उनके एक्सपीरियंस के डिटेल्ड इवैल्यूएशन का प्रोसेस 2 हफ़्ते तक चलेगा ताकि रिसर्चर्स उन एस्ट्रोनॉट्स की फिजिकल और मेंटल हालत को बेहतर ढंग से समझ सकें जो लंबे समय तक धरती से दूर रहते हैं।

एकांतवास से बाहर आने के बाद, एलन एलिस ने इस एक्सपेरिमेंट को एक ऐसा साल बताया जिसमें उन्होंने अपनी मर्ज़ी से खुद को बाहरी दुनिया से अलग कर लिया।

यह नासा का मंगल ग्रह पर जीवन की जैसा जीवन बिताने की नक़ल करने के लिए दूसरा 1-साल का प्रयोग था, इससे पहले 2024 में भी ऐसा ही एक प्रयोग पूरा किया जा चुका है।

नासा को उम्मीद है कि इस स्टडी के नतीजे चांद और मंगल ग्रह पर भविष्य के मिशन की तैयारी में मदद करेंगे, जहां एस्ट्रोनॉट्स को कई सालों तक पृथ्वी और अपने परिवारों से दूर रहना पड़ सकता है और तुरंत मदद नहीं मिल पाएगी।

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